जातीय भेदभाव के खिलाफ 13 फरवरी को अखिल भारतीय विरोध दिवस, झारखंड में आंदोलन की रणनीति तय

रांची, 11 फरवरी : झारखंड सहित देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में कथित जातीय भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने 13 फरवरी को अखिल भारतीय विरोध दिवस मनाने का एलान किया है। इस दिन देश के 100 से अधिक विश्वविद्यालय परिसरों में एक साथ प्रदर्शन, सभाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
यह निर्णय अखिल भारतीय समता मंच के बैनर तले लिया गया है, जिसका गठन 8 फरवरी को दिल्ली में हुआ। मंच का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में सामाजिक न्याय, समानता और गरिमापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है।
इसी क्रम में झारखंड के विभिन्न छात्र संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक श्याम प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय स्थित जैकब हॉल में आयोजित की गई। बैठक में आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई और पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल समिति का गठन किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों में बढ़ते जातीय भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं चिंताजनक हैं। उन्होंने मांग की कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 को प्रभावी रूप से लागू किया जाए तथा रोहित एक्ट को अविलंब कानून का दर्जा दिया जाए, ताकि छात्रों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
बैठक में आदिवासी छात्र संगठन, AISA, CRJD, AISF, छात्र राजद, MSF और मूलवासी विद्यार्थी संघ के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। वहीं NSUI, JCM और SFI सहित अन्य छात्र संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि 13 फरवरी का विरोध दिवस केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक चेतना जगाने और उच्च शिक्षा संस्थानों को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।



