चांडिल : सरकारी जमीन पर दिनदहाड़े कब्जा, प्रशासन मौन – पूड़ीसीली में ‘जमीन माफिया’ का आतंक

चांडिल, 20 अगस्त : सरायकेला-खरसावां जिले में भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे अब खुलेआम सरकारी जमीन पर कब्जा करने में जुट गए हैं। चांडिल अंचल के मौजा पूड़ीसीली में ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली और उसकी निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, कांदरबेड़ा–दोमुहानी मार्ग स्थित पूड़ीसीली चौक के समीप आशियाना प्रकृति फ्लैट निर्माण स्थल के पीछे की सरकारी भूमि पर भूमाफियाओं ने चारों ओर से टीना शेड लगाकर घेराव करना शुरू कर दिया है। जबकि इसी जमीन पर झारखंड सरकार का बाकायदा बोर्ड लगा हुआ है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है –

“झारखंड सरकार, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, मौजा पूड़ीसीली, थाना संख्या 328, खाता संख्या 234, खेसरा संख्या 205। यह भूमि सरकारी है, इस भूमि का क्रय-विक्रय या अतिक्रमण दंडनीय अपराध है।”
इसके बावजूद माफिया तत्व बिना किसी भय के कब्जे की कार्रवाई कर रहे हैं।
स्थानीय मुखिया ने कहा कि यह जमीन पूरी तरह सरकारी है और प्रशासन ने पहले ही इसे चिन्हित कर सुरक्षित घोषित किया था। बावजूद इसके यदि उस पर कब्जा हो रहा है तो यह न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि कानून और शासन-प्रशासन का खुला मजाक भी है।

ग्रामीणों का आक्रोश – ‘भूमाफिया और प्रशासन की मिलीभगत’
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-दहाड़े सरकारी भूमि पर कब्जा और प्रशासन का मौन रहना गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर सख्ती होती तो भूमाफिया इतनी हिम्मत ही नहीं जुटा पाते।
ग्रामीणों का कहना है कि पूड़ीसीली में सक्रिय भूमाफिया सरकारी जमीन को अपनी पैतृक संपत्ति समझ बैठे हैं। दिन-दहाड़े टीना शेड खड़ा करके जमीन पर कब्जा करना उनकी गुंडागर्दी को दर्शाता है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर ये माफिया सरकारी जमीन पर कब्जा करने का दुस्साहस कर रहे हैं।

फिलहाल यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पूछ रहे हैं – “जब बोर्ड पर साफ लिखा है कि अतिक्रमण अपराध है, तो सरकार और प्रशासन चुप क्यों हैं? क्या प्रशासन इन माफियाओं पर लगाम कस पाएगा या सरकारी जमीन पर कब्जे का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?”
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जब आशियाना प्रकृति नाम का प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तब वन विभाग, चांडिल अंचल प्रशासन एवं स्थानीय रैयतों की मौजूदगी में जमीन की मापी कर सीमांकन किया था। सड़क किनारे की भूमि रैयती है, जिसपर “आशियाना प्रकृति” का फ्लैट्स निर्माण चल रहा है। उसके ठीक पीछे सरकारी भूमि हैं, वहीं उसके बाद वन विभाग की भूमि, जंगल व पहाड़ स्थित है। हालांकि, समय -समय पर यह भी सवाल खड़े होते हैं कि आशियाना प्रकृति के प्रोजेक्ट निर्माण में सभी प्रकार के सरकारी नियमों का पालन किए गए हैं क्या? क्या सीएनटी-एसपीसी एक्ट और वन संरक्षक नियमों का पालन करते हुए बहुमंजिला भवन निर्माण किया जा रहा है?



