ईचागढ़ में श्रद्धा व उत्साह के साथ संपन्न हुई बिदु चांदन पूजा

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ईचागढ़ में श्रद्धा व उत्साह के साथ संपन्न हुई बिदु चांदन पूजा

ईचागढ़, 01 फरवरी : ईचागढ़ प्रखंड के कुरूकतोपा स्थित बाबा तिलका मांझी ओल ईतुन आसड़ा में रविवार को विद्या, संस्कृति और आदिवासी अस्मिता की प्रतीक बिदु चांदन पूजा श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर ओलचिकी लिपि के रचयिता पंडित रघुनाथ मुर्मू (ओनोल बोगा) को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना से हुई। पूजा स्थल को आदिवासी कला, प्रतीकों और साज-सज्जा से आकर्षक रूप से सजाया गया था।

 

इस अवसर पर ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने विद्या की देवी बिदु चांदन से समाज में ज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के प्रसार की कामना की। मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही।

 

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बिदु चांदन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की भाषा, शिक्षा और संस्कृति को सहेजने का सशक्त माध्यम है। ओलचिकी लिपि ने संथाली भाषा को नई पहचान दी है और यह आयोजन युवाओं को अपनी मातृभाषा एवं परंपराओं से जोड़ने का कार्य करता है।

 

कार्यक्रम में मुकेश हेम्ब्रम, सनातन हेम्ब्रम, कलेबर हेम्ब्रम, मोडे मांझी सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। पूजा के उपरांत सामूहिक प्रसाद वितरण किया गया।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बिदु चांदन पूजा के वार्षिक आयोजन से क्षेत्र में सामाजिक एकता मजबूत होती है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद मिलती है।

 

आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीण युवाओं की भी सराहनीय भूमिका रही। पूरे क्षेत्र में दिनभर धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण बना रहा।

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