करंजिया में हो’ भाषा आंदोलन की राष्ट्रीय समीक्षा सभा, आठवीं अनुसूची में शामिल करने का संकल्प

करंजिया (मयूरभंज, ओडिशा), 23 फरवरी : “अबुऐ जाति हो, अबुऐ भाषा हो, अबुऐ दोरोम सरना” के नारों के बीच 22 फरवरी को करंजिया स्थित हो’ संस्कृति भवन में हो’ भाषा जन आंदोलन “दोलाबु दिल्ली” को लेकर राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन Ho Language Action Committee, Central Team के तत्वावधान में किया गया, जिसमें कोल्हान (झारखंड) के तीनों जिलों के अलावा ओडिशा के विभिन्न जिलों से जुड़े सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए।
सभा में पिछले लगभग 40 वर्षों से चल रहे हो’ भाषा प्रचार-प्रसार, भाषा विकास और आंदोलन की उपलब्धियों व चुनौतियों पर विस्तार से मंथन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि हो’ भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए जन आंदोलन को और व्यापक एवं संगठित रूप देने की आवश्यकता है। इस दिशा में जमीनी स्तर पर अभियान तेज करने और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया।
ओडिशा में वर्षों से सक्रिय सामाजिक संस्था Sida Hora Suser Akara सहित विभिन्न संगठनों ने सभा में पारित प्रस्तावों का समर्थन किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ओडिशा में लंबे समय से निवासरत हो’ समुदाय को अलग-अलग जातीय श्रेणियों में विभाजित किए जाने से सामाजिक एकता प्रभावित हुई है। आगामी जनगणना में सभी हो’ भाषा-भाषियों को एक ही ‘हो’ जाति’ के रूप में सूचीबद्ध कराने की मांग को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया गया।
झारखंड से प्रतिनिधित्व करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता एवं देशाउली फाउंडेशन के संस्थापक साधु हो’ ने आंदोलन की रणनीति में समयानुकूल बदलाव की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने हो’ भाषा और वरंग क्षिति लिपि के जनक ओत गुरु कोल लाको बोदरा द्वारा स्थापित आदि संस्कृति विज्ञान केंद्र तथा आदिवासी हो समाज महासभा जैसे संगठनों के साथ समन्वय बढ़ाकर आंदोलन को नई दिशा देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में आदिवासी हो’ समाज युवा महासभा झारखंड और हो’ स्टूडेंट यूनियन ओडिशा के कोषाध्यक्षों ने जनसहयोग से प्राप्त राशि का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया। सभा का समापन सामुदायिक एकता और संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के संकल्प के साथ हुआ।



