अंधारझोर की मिट्टी से निकली उम्मीद की किरण – उपायुक्त ने जमीन पर बैठकर जाना शिल्पकारों का दर्द, दिया भरोसे का संदेश

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अंधारझोर की मिट्टी से निकली उम्मीद की किरण – उपायुक्त ने जमीन पर बैठकर जाना शिल्पकारों का दर्द, दिया भरोसे का संदेश

रिपोर्ट: ManbhumUpdates.com संवाददाता

जमशेदपुर/बोड़ाम, 14 जुलाई : जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण सोमवार को उस समय देखने को मिला, जब पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी सुदूरवर्ती आदिवासी गांव अंधारझोर पहुंचे। यहां वे गांव के वाद्ययंत्र शिल्पकारों से सीधे जमीन पर बिछी एक दरी पर बैठकर मिले और उनके जीवन, कला, समस्याओं और सपनों की तस्वीर को करीब से देखा-समझा।

करीब 70 परिवारों वाले इस गांव के कारीगर तबला, मांदर, ढोल, मृदंग जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों को कई पीढ़ियों से बना रहे हैं। गांव की पहचान इन कारीगरों की इसी अद्भुत कला से है, परंतु बाजार, लागत व आय की समस्याओं ने इस परंपरा को संकट में डाल दिया है। उपायुक्त ने इस स्थिति को समझते हुए ग्रामीणों से खुले दिल से बातचीत की।

संवेदनशील प्रशासक की सरलता

श्री सत्यार्थी की यह यात्रा केवल एक औपचारिकता नहीं थी। उन्होंने जब जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की बातें सुनीं, तो शिल्पकारों ने भी दिल खोलकर अपनी समस्याएं रखीं। उपायुक्त ने न केवल इन समस्याओं को गंभीरता से सुना, बल्कि हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।

व्यवस्थित बाजार, ब्रांडिंग और प्रशिक्षण का भरोसा

उपायुक्त ने शिल्पकारों की आय बढ़ाने और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की बात कही। उन्होंने उत्पादों की ब्रांडिंग, ट्रेड मार्क, लोगो निर्माण एवं स्थायी विपणन व्यवस्था स्थापित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही बोड़ाम-अंधारझोर मुख्य सड़क के पास कम्युनिटी फैसिलिटी सेंटर (CFC) निर्माण का प्रस्ताव शीघ्र भेजे जाने को कहा, जिससे शिल्पकारों और ग्राहकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो सके।

शहर से भी जोड़ी जा रही उम्मीदें

गांव लौटने के बाद उपायुक्त ने साकची बाजार में विश्वकर्मा प्वाइंट का निरीक्षण किया और वहां शिल्पकारों के लिए बनाए गए शेड का पक्का निर्माण कराने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ अंधारझोर के शिल्पकारों तक पहुंचाने का आदेश भी संबंधित पदाधिकारियों को दिया।

महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल

गांव की महिलाओं को जेएसएलपीएस एवं आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की बात भी उपायुक्त ने कही। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगी, बल्कि महिलाओं की सामाजिक भूमिका को भी नया आयाम देगी।

अंधारझोर में उपायुक्त का यह दौरा केवल एक प्रशासनिक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह विश्वास, संवेदना और संकल्प की मिसाल बन गया। जमीन पर बैठकर जनता की बात सुनना, उनकी परेशानियों को समझना और समाधान की दिशा में कदम उठाना दर्शाता है कि जब अफसर ज़मीन से जुड़ते हैं, तो नीतियां असरदार बनती हैं।

जिला प्रशासन के इस मानवीय पहल के लिए उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी को धन्यवाद व बधाई। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि अंधारझोर जैसे गांवों की कला फिर से निखरेगी और युवा अपने पूर्वजों की परंपरा को सम्मान के साथ अपनाएंगे।

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