चोरी या किराया? चांडिल में बरामद जेसीबी मशीन पर दो पक्षों का दावा — रविवार को थाना परिसर में हुई तीखी बहस, अंततः पुलिस ने छत्तीसगढ़ के दावेदार को सौंपी मशीन

चांडिल, 14 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत चिलगु में बरामद जेसीबी मशीन को लेकर विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच चुका है। रविवार को चांडिल थाना परिसर में इस मशीन को लेकर दो पक्षों के बीच जमकर कहासुनी हुई। एक ओर छत्तीसगढ़ निवासी अमरलाल साहू इसे अपनी चोरी हुई मशीन बता रहे थे, वहीं दूसरी ओर चिलगु निवासी चंद्र मोहन प्रमाणिक किराए पर मंगवाने का दावा कर रहे थे। लेकिन घटनाक्रम में तेजी तब आई जब चांडिल पुलिस ने छत्तीसगढ़ के मालखरौदा पुलिस से संपर्क किया।
मालखरौदा थाना पुलिस ने पुष्टि की कि अमरलाल साहू ने जेसीबी मशीन चोरी होने को लेकर उनके थाने में पहले ही लिखित शिकायत आवेदन किया है। इस आधिकारिक पुष्टि के बाद चांडिल पुलिस ने संदेह के घेरे में खड़ी जेसीबी मशीन अमरलाल साहू को सौंप दी।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार को पुलिस ने चिलगु निवासी चंद्र मोहन प्रमाणिक के चारदीवारी के भीतर खड़ी पीले रंग की एक जेसीबी मशीन को जप्त किया था। इसके बाद यह मामला तब विवादास्पद हो गया जब छत्तीसगढ़ निवासी अमरलाल साहू ने सामने आकर दावा किया कि यह मशीन उन्हीं की है, जिसे उन्होंने एक व्यक्ति को ₹25.16 लाख में बेचा था, लेकिन सौदे के बाद उन्हें केवल ₹1.5 लाख नकद मिले और बाकी का भुगतान न चेक के रूप में हुआ और न ही नकद।
किराए के दावे पर संदेह
चंद्र मोहन प्रमाणिक ने पुलिस को बताया कि उन्होंने यह मशीन ओडिशा से ₹1 लाख मासिक किराए पर ली है। मगर मशीन पर दर्ज रजिस्ट्रेशन नंबर OD14 G 3853 था, जबकि अमरलाल साहू ने दावा किया कि मशीन का असली रजिस्ट्रेशन OD17 Y 6223 है। इस नंबर की गड़बड़ी ने मामले को और संदेहास्पद बना दिया।
पुलिस ने दोनों पक्षों से दस्तावेज तलब किए और जांच में जुट गई। मगर रविवार को थाना परिसर में हुई तीखी बहस और मालखरौदा थाना द्वारा दावे की पुष्टि के बाद चांडिल पुलिस ने जेसीबी मशीन अमरलाल साहू को सौंप दी।
इससे यह स्पष्ट होता है कि मशीन को कथित तौर पर किराए पर देने और लेने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं थीं, जो किसी गहरे षड्यंत्र की ओर इशारा करती हैं। पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि ओडिशा के जिस व्यक्ति से चंद्र मोहन ने मशीन ली, उसका असल रोल क्या था और कहीं वह इस गड़बड़ी में शामिल तो नहीं।
यह मामला सिर्फ एक चोरी की मशीन तक सीमित नहीं लगता, बल्कि इसमें फर्जी रजिस्ट्रेशन, फर्जी किराया समझौता और वाहनों की अवैध खरीद-बिक्री जैसे गंभीर अपराधों की आशंका है, जिसकी गहराई से जांच जरूरी है।



