अपने सपनों को साकार करने के लिए फिर से चलेगा चक्रधरपुर का रातू गगराई

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अपने सपनों को साकार करने के लिए फिर से चलेगा चक्रधरपुर का रातू गगराई

जमशेदपुर, 05 मई : चक्रधरपुर का 13 वर्षीय रातू गगराई जीवन के जटिल बाधाओं को हराते हुए फिर से नई जिंदगी की शुरूआत करेगा। पिछले 8 महीनों से एमजीएम अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे रातू ने मंगलवार को जब अपने कृत्रिम पैरों के सहारे पहला कदम बढ़ाया, तो उसके चेहरे पर अजीव सा खुशी झलक रहा था। रातू को चलता देखकर अस्पताल के वार्ड में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। रातू अपने नए पैरों पर खड़ा होकर कुछ कदम चला, तो उसकी मां की खुशी के आंसू नहीं रुक रहे थे। इस अवसर पर 9वीं कक्षा के छात्र रातू ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं। अब मैं फिर से चलकर अपनी पढ़ाई पूरी करूंगा।

दरअसल, 27 सितंबर 2025 की शाम लगभग 6 बजे चक्रधरपुर के गोपीनाथपुर निवासी सन्नी गगराई का पुत्र रातू गगराई शौच के लिए खेत जा रहा था। तभी वह वहां जमीन पर गिरे 33 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया। इस हादसे में वह 60 प्रतिशत से ज्यादा झुलस गया था। एमजीएम अस्पताल के बर्न यूनिट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ललित मिंज ने रातू को बचाने की जिम्मेदारी उठाई। 8 महीनों के लंबे इलाज के दौरान तीन जटिल ऑपरेशन किए गए। लंबे इलाज के बाद मंगलवार को रातू आर्टिफिशियल पैर पर वॉकर के सहारे पहली बार चला, जो उसके पुनर्जन्म से कम नहीं था।

इलाज के दौरान रातू की मां लता गागराई ने अपने शरीर का चमड़ा दान किया, जिसे चिकित्सकों ने रातू के शरीर पर ट्रांसप्लांट किया।. दूसरा ऑपरेशन (2 दिसंबर 2025) को किया गया, जिसमें झुलसे हुए अंगों को बचाने के लिए सर्जरी की गई। संक्रमण को फैलने से रोकने और रातू की जान बचाने के लिए चिकित्सकों को उसके दोनों पैर काटने पड़े। पैर गंवाने के बाद रातू मानसिक रूप से टूट चुका था, लेकिन डॉ. मिंज ने उसे फिर खड़ा करने की ठानी। इस नेक कार्य में उसे बाहरी मदद भी मिली। फाइब्रो हिल कंपनी के एरिया मैनेजर मुकेश चंद्रवंशी ने 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। कृत्रिम अंग विशेषज्ञ बीके सिंह ने बहुत कम खर्च पर आर्टिफिशियल पैर तैयार किए और नि:शुल्क वॉकर भी प्रदान किया।

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