
116 गांव प्रभावित, फिर विकास सिर्फ 43 गांवों तक क्यों? जिप उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने जांच समिति के समक्ष उठाए सवाल, पुनर्वास जमीन का पंजी-2 में हस्तांतरण और 179 आरएल से नीचे जलस्तर रखने की मांग
चांडिल, 31 अक्टूबर : सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास और विकास कार्यों में कथित अनियमितता का मामला एक बार फिर गरमा गया है। पुनर्वास मद में करीब 13 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से गठित पांच सदस्यीय समिति ने शुक्रवार को चांडिल में सुनवाई की। इस दौरान विस्थापितों के भुगतान से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख अपने कब्जे में लेकर जांच टीम रांची लौट गई। समिति अब आरएल-180 से 183 मीटर तक के प्रभावित गांवों में भुगतान की गांववार जांच करेगी।
घोड़ानेगी स्थित गोल्डन व्यू रिसोर्ट, आईबी डैम कॉलोनी में आयोजित सुनवाई के दौरान जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने विस्थापितों की लंबित समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब चांडिल डैम परियोजना से कुल 116 गांव प्रभावित हुए हैं, तो विकास कार्य महज 43 गांवों तक ही क्यों सीमित हैं? उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से विकास कार्य ठप पड़े हैं। कई आंशिक रूप से प्रभावित गांवों के लोगों को आज तक विकास पुस्तिका तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
जिप उपाध्यक्ष ने पुनर्वास के लिए अधिग्रहित जमीन का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के उद्देश्य से अधिग्रहित जमीन अब तक संबंधित विभाग के नाम विधिवत हस्तांतरित नहीं हुई है। अंचल कार्यालय के पंजी-2 में भी इसका संधारण नहीं किया गया है। ऐसे में विस्थापितों को उनकी पुनर्वास जमीन का अधिकार और पट्टा कब मिलेगा, यह बड़ा सवाल है।
धान की फसल डूबने से किसानों की बढ़ी परेशानी
मधुश्री महतो ने डैम में जल भंडारण के कारण किसानों को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि कुकड़ू प्रखंड की सभी नौ पंचायतें परियोजना से प्रभावित हैं। दयापुर, कुमारी, झापागोड़ा, उदाटांड़, बांदाबीर, केंदुआंदा, चौका, आदारडीह और चानो समेत कई गांवों में धान की तैयार फसल जलमग्न हो गई है। उन्होंने मांग की कि जब तक विस्थापितों की लंबित अनुदान राशि का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक डैम का जलस्तर 179 आरएल से नीचे रखा जाए।
13 करोड़ के भुगतान में गड़बड़ी की आशंका, रांची ले जाए गए दस्तावेज
सुनवाई के दौरान विस्थापित मुक्ति वाहिनी के अंबिका यादव ने पुनर्वास राशि के भुगतान में गंभीर अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आरएल-180 मीटर से ऊपर के 10 गांवों के विस्थापितों के लिए निर्धारित पुनर्वास राशि दूसरे गांवों के कथित अपात्र लोगों को भुगतान कर दी गई है। इस पूरे मामले में करीब 13 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति ने आरएल-180 से 183 मीटर तक के प्रभावित गांवों के भुगतान संबंधी अभिलेख अपने कब्जे में ले लिए और उन्हें जांच के लिए रांची ले गई। नीमडीह प्रखंड के हेवेन गांव में किए गए भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति अब गांववार अभिलेखों का सत्यापन करेगी। विस्थापित संगठनों ने जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
विस्थापितों के लिए रोजगार, बाजार और पर्यटन विकास की मांग
जिप उपाध्यक्ष मधुश्री महतो, विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो और विस्थापित मुक्ति वाहिनी के अंबिका जादव ने संयुक्त रूप से कई मांगें रखीं। इनमें धारा-4 के प्रावधान को एक समान लागू करते हुए वर्ष 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले सभी पात्र विस्थापितों की विकास पुस्तिका बनाने, भुगतान का सत्यापन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विस्थापित संगठनों की उपस्थिति में कराने तथा विकास योजनाओं में आरएल की बाध्यता समाप्त कर वास्तविक जरूरत के आधार पर काम कराने की मांग शामिल है।
इसके अलावा परियोजना और डैम का पानी इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में स्थानीय विस्थापित युवाओं को सीधी नियुक्ति अथवा प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने, मुखिया होटल से अनुमंडल कार्यालय तक मार्केट प्लेस विकसित कर वास्तविक विस्थापितों को दुकानें आवंटित करने तथा रसुनिया, दुलमी और पातकुम में नौका विहार एवं पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की मांग भी उठाई गई।
सुनवाई की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग की अवर सचिव आर. रॉनिटा ने की। पांच सदस्यीय जांच समिति में संयुक्त सचिव अजय सिंह बड़ाईक, अधीक्षण अभियंता कुमार अरविन्द, अधीक्षण अभियंता ओंकार नाथ और उप सचिव प्रभाष कुमार दत्ता शामिल थे। मौके पर अपर निदेशक गौतम कुमार भगत एवं पुनर्वास पदाधिकारी सुखदेव महतो भी उपस्थित थे।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर:
वर्षों से पुनर्वास और मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे विस्थापितों को उम्मीद है कि भुगतान अभिलेखों की गांववार जांच से कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने आएगी और लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल होगी।



