सातवें झारखंड राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का भव्य आगाज, पहले दिन 15 फिल्मों की स्क्रीनिंग

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पांच दिनों तक तीन शैक्षणिक संस्थानों में दिखाई जाएंगी फिल्में, 90 फिल्मों के प्रदर्शन का लक्ष्य

जमशेदपुर, 22 अक्टूबर : लौहनगरी जमशेदपुर में सिनेमा, कला और संस्कृति के संगम सातवें झारखंड राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (JNFF) का गुरुवार को बिष्टुपुर स्थित सेंटर फॉर एक्सीलेंस ऑडिटोरियम में भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के पहले दिन फिल्म ‘प्रेरणा’ के प्रदर्शन के साथ फिल्मों की स्क्रीनिंग शुरू हुई। पहले दिन कुल 15 फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इस वर्ष महोत्सव के दौरान लगभग 90 फिल्मों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करना, उभरते फिल्मकारों और कलाकारों को मंच प्रदान करना तथा झारखंड की कला-संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाना है।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीडीपीओ दुर्गेश नंदिनी उपस्थित रहीं। इस दौरान एन.के. सिंह, महोत्सव के संरक्षक अरुण बकरेवाल, संरक्षक पूर्वी घोष, डॉ. जे.एन. दास, दशरथ हांसदा, मान सिंह मांझी और पवन अग्रहरि समेत कला, साहित्य एवं फिल्म जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। फिल्मकारों, कलाकारों और विद्यार्थियों की भागीदारी से समारोह में उत्साह का माहौल रहा।

‘प्रेरणा’ से शुरुआत, ‘मिट्टी का सम्मान’ के साथ पहले दिन का समापन

महोत्सव के पहले दिन निर्देशक ज्योति लाल लोढ़ी की फिल्म ‘प्रेरणा’ का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा ‘बार बीतें’, ‘हासा लैगिड’, ‘मोर अधिकार’, ‘कहो ना प्यार है’, ‘झूठी थाली’, ‘तय है सुबह का आना’, ‘चांदो एपिल’ (चांद और तारे), ‘काला सोना’, ‘संगत’ (भैया की साली), ‘दिव्या’, ‘दादाजी अथोना’ और ‘तमस-अंधकार’ सहित विभिन्न विषयों पर आधारित फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई। पहले दिन की अंतिम फिल्म ‘मिट्टी का सम्मान’ रही।

अलग-अलग भाषाओं और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की फिल्मों के प्रदर्शन के जरिए दर्शकों को विविध कहानियों, सामाजिक सरोकारों और क्षेत्रीय जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिला।

पांच दिनों तक तीन संस्थानों में होगा फिल्मों का प्रदर्शन

महोत्सव की क्रिएटिव डायरेक्टर शालिनी प्रसाद ने बताया कि 22 और 23 अक्टूबर को बिष्टुपुर स्थित सेंटर फॉर एक्सीलेंस में फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी। इसके बाद 24 और 25 अक्टूबर को जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी, बिष्टुपुर में फिल्में दिखाई जाएंगी। वहीं, 26 अक्टूबर को श्रीनाथ यूनिवर्सिटी, आदित्यपुर में फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों में फिल्म प्रदर्शन का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को सिनेमा की दुनिया से जोड़ना तथा फिल्म निर्माण की रचनात्मक प्रक्रिया से परिचित कराना है। इससे युवाओं को विभिन्न भाषाओं की फिल्मों को समझने, नए विचारों से जुड़ने और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करने का अवसर मिलेगा।

आज 2:30 बजे से रात 8:30 बजे तक होगी स्क्रीनिंग

महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे से रात 8:30 बजे तक फिल्मों का प्रदर्शन निर्धारित है। इस दौरान ‘गरीब अमीर’, ‘मोरी गोली तो पाई मु’, ‘किसंद बोंगा’, ‘ओ छोरा’, ‘ऑवर ड्यूटी फॉर नेचर’, ‘सहारा’, ‘वंदे मातरम’, ‘प्रेरणा’, ‘बूंद’, ‘मैं हूं करहूं बिहाव’, ‘फूल औ डारी’ और ‘टूटी उड़ान’ सहित अन्य फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी।

आयोजकों को उम्मीद है कि महोत्सव के जरिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी, युवा और सिनेमा प्रेमी जुड़ेंगे। विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों के माध्यम से दर्शकों को भारतीय सिनेमा की विविधता से रूबरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

मास्टर क्लास में रवि राज मुर्मू ने साझा किए अनुभव

महोत्सव के दौरान आयोजित मास्टर क्लास में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित रवि राज मुर्मू ने विद्यार्थियों, फिल्मकारों और कलाकारों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियों से प्रतिभागियों को परिचित कराया। इस सत्र के माध्यम से युवाओं को अनुभवी फिल्मकार से सीखने और सिनेमा की रचनात्मक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।

2018 में हुई थी महोत्सव की शुरुआत

झारखंड राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2018 में संजय उदय सतपथी और राजू मित्रा के प्रयासों से हुई थी। महोत्सव का उद्देश्य नए फिल्मकारों एवं कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना, क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा देना और झारखंड की कला, संस्कृति एवं प्रतिभाओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

सातवें संस्करण तक पहुंच चुका यह महोत्सव स्थानीय फिल्म जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। इस वर्ष लगभग 90 फिल्मों के प्रदर्शन का लक्ष्य रखा गया है। महोत्सव के माध्यम से स्थापित फिल्मकारों के साथ-साथ नई प्रतिभाओं को भी अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

आयोजन टीम की रही अहम भूमिका

महोत्सव के सफल आयोजन में यूनिट हेड शिवांगी सिंह, एडमिन हेड जॉयश्री, क्रिएटिव डायरेक्टर शालिनी प्रसाद, नैंसी सिंह, काशीष जैन, राज प्रमाणिक, नवीन प्रधान, ललित साव समेत आयोजन टीम के अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजकों ने फिल्मकारों, कलाकारों, विद्यार्थियों और शहरवासियों से महोत्सव में भागीदारी कर इसे सफल बनाने की अपील की।

सातवां झारखंड राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय प्रतिभाओं को मंच देने, युवाओं को फिल्म निर्माण के लिए प्रेरित करने और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।

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