निबंधन विभाग ने साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को माना स्वतंत्र पंजीकृत संस्था – संपत्ति व अधिकार संबंधी विवाद सिविल कोर्ट में उठाने की बात
जमशेदपुर, 20 अगस्त : साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के निबंधन को चुनौती देने के मामले में निबंधन विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट में साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, निबंधन संख्या 33/2015-16, को स्वतंत्र एवं पृथक रूप से पंजीकृत संस्था माना गया है। साथ ही उसके संविधान और उपनियमों को विधिक रूप से प्रभावी बताया गया है। इस रिपोर्ट को साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपनी बड़ी जीत बताया है।
बुधवार को साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार निशान सिंह और जमशेदपुर न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता केएम सिंह ने प्रेस वार्ता कर संयुक्त जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक किया। उन्होंने दावा किया कि जांच में साकची गुरुद्वारा के स्वतंत्र संवैधानिक अस्तित्व और वैधानिक अधिकारों की पुष्टि हुई है।

अधिवक्ता केएम सिंह ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच, दोनों पक्षों की सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद जांच समिति ने अपना निष्कर्ष दिया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक स्वतंत्र रूप से निबंधित संस्था है और उसका संविधान विधिक रूप से मान्य है। किसी अन्य संस्था के नियमों के आधार पर उसकी वैधानिक स्थिति को चुनौती नहीं दी जा सकती। यदि किसी पक्ष को अधिकार संबंधी आपत्ति है तो उसके समाधान का उचित मंच न्यायालय है।
निबंधन रद्द कराने की मांग पर उठे सवाल
सीजीपीसी की ओर से शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2015-16 में साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उसे विश्वास में लिए बिना निबंधन कराया और उपनियमों में संशोधन किया। जांच समिति ने इस संबंध में कहा कि यदि किसी संस्था के संशोधित उपनियम निर्धारित विभागीय प्रक्रिया के तहत पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए हैं, तो उन्हें संबंधित संस्था के विधिवत बाई-लॉ का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इस निष्कर्ष से शिकायत के प्रमुख आधार पर सवाल खड़े हुए हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि सीजीपीसी अपने पुराने जनरल बोर्ड से पारित नियमों अथवा संशोधनों को प्रभावी बनाना चाहती है, तो उसे निबंधन विभाग के समक्ष निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अपने बाई-लॉ में संशोधन कराना होगा। केवल दावा करने से ऐसे नियम प्रभावी नहीं माने जा सकते।
संपत्ति विवाद सिविल कोर्ट में निस्तारित होगा
संयुक्त जांच प्रतिवेदन में संस्था की परिसंपत्तियों और नियंत्रण से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया गया है। जांच समिति के अनुसार इस तरह के अधिकार संबंधी विवादों का निस्तारण निबंधन विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ऐसे मामलों का फैसला सक्षम व्यवहार न्यायालय यानी सिविल कोर्ट द्वारा किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार उप निबंधन महानिरीक्षक के निर्देश पर दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना गया था। 25 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में दोनों पक्ष उपस्थित हुए और लिखित एवं मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। शिकायतकर्ता की ओर से वर्ष 2003 के जनरल बोर्ड द्वारा पारित बताए गए नियम एवं उपनियम भी जांच समिति के समक्ष रखे गए। दस्तावेजों और दोनों पक्षों के पक्ष को सुनने के बाद समिति ने अपना निष्कर्ष प्रस्तुत किया।
‘सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं’
साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार निशान सिंह ने संयुक्त जांच रिपोर्ट को संघर्ष की जीत बताते हुए कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।” उन्होंने कहा कि यह केवल साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की नहीं, बल्कि पूरे सिख समाज की जीत है। उन्होंने कहा कि सत्य और वैधानिक अधिकारों के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कहा कि संयुक्त जांच रिपोर्ट ने उसके स्वतंत्र संवैधानिक अस्तित्व और निबंधन की वैधता को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया है। वहीं, अधिकार और संपत्ति से जुड़े किसी भी विवाद के लिए संबंधित पक्षों को न्यायालय की शरण लेने का रास्ता खुला है।













