वार्ड 17 में विकास बनाम व्यक्तित्व की जंग, 23 फरवरी को मतदाता करेंगे फैसला

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वार्ड 17 में विकास बनाम व्यक्तित्व की जंग, 23 फरवरी को मतदाता करेंगे फैसला

 

आदित्यपुर, 19 फरवरी : नगर निगम का सर्वाधिक मतदाताओं वाला वार्ड 17 इस बार बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय मुकाबले का केंद्र बन गया है। 23 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले प्रचार थमने में अब 72 घंटे से भी कम समय शेष है। ऐसे में चुनावी तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट होती दिख रही है।

करीब छह हजार से अधिक मतदाताओं वाले इस वार्ड की सामाजिक संरचना इसे अन्य वार्डों से अलग बनाती है। लगभग 50 प्रतिशत मतदाता महिलाएं हैं, जबकि करीब 70 प्रतिशत मतदाता उच्च मध्यमवर्ग और प्रोफेशनल वर्ग से आते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, सेवानिवृत्त अधिकारी, बिल्डर और कारोबारी वर्ग की सक्रिय भागीदारी इस वार्ड को बौद्धिक रूप से सजग बनाती है। यहां भावनात्मक नारों से अधिक प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और शांत वातावरण को प्राथमिकता दी जा रही है।

 

 

निवर्तमान पार्षद नीतू शर्मा इस वार्ड की एकमात्र महिला प्रत्याशी हैं। उनके पिछले कार्यकाल के कामकाज को लेकर मतदाताओं के बीच सकारात्मक चर्चा है। वार्ड में यह धारणा बनती दिख रही है कि शांति और संतुलित प्रशासन बनाए रखने के लिए अनुभव महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों का मानना है कि कार्यकाल का तुलनात्मक मूल्यांकन इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकता है। हालांकि मतदाता खुलकर समर्थन व्यक्त नहीं कर रहे, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके पक्ष में रुझान दिखाई दे रहा है।

 

अन्य प्रत्याशी भी मैदान में सक्रिय

कांग्रेस प्रत्याशी अंबुज कुमार अपने पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा कर रहे हैं। हालांकि पिछले कार्यकाल और वादों को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। भाजपा के बॉबी सिंह अपनी राजनीतिक पहचान के दम पर मुकाबले में हैं, लेकिन वार्ड के एक वर्ग में उनकी शैली को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया है।

युवा प्रत्याशी अमित रंजन उर्फ “शानू” ने आक्रामक प्रचार किया, परंतु कुछ विवादित बयानों के कारण उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा है। वहीं राजद के विरेंद्र सिंह यादव संगठनात्मक समर्थन के सहारे चुनावी समीकरण साधने में जुटे हैं, लेकिन जातीय वोटों में विभाजन की संभावना उनके लिए चुनौती बन सकती है। रामचंद्र पासवान भी मैदान में हैं, परंतु उनका जनसंपर्क अभियान अपेक्षाकृत कमजोर माना जा रहा है।

सामाजिक समीकरण बनेंगे निर्णायक

करीब 20 प्रतिशत मध्यमवर्गीय मतदाता जातीय समीकरणों से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि लगभग 10 प्रतिशत मतदाता स्लम क्षेत्र से आते हैं, जहां अंतिम समय की रणनीति असर डाल सकती है। इसके बावजूद उच्च शिक्षित और प्रोफेशनल वर्ग का झुकाव चुनाव की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

महिला मतदाता निभा सकती हैं अहम भूमिका

वार्ड में महिला मतदाताओं की बड़ी संख्या इस चुनाव को विशेष बना रही है। राजनीतिक जागरूकता और प्रतिनिधित्व की भावना महिला मतदाताओं के निर्णय को प्रभावशाली बना सकती है।

फिलहाल चुनावी मुकाबला खुला है और सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में डटे हैं। हालांकि जमीनी संकेतों के आधार पर नीतू शर्मा को बढ़त मिलती प्रतीत हो रही है। अब देखना यह है कि 23 फरवरी को मतदाता किसके पक्ष में अपना विश्वास जताते हैं।

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