चांडिल न्यायालय का फैसला : हाफ मर्डर मामले में नीमडीह के बादल को 08 वर्ष का कारावास, 15 हजार रूपये जुर्माना

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चांडिल न्यायालय का फैसला : हाफ मर्डर मामले में नीमडीह के बादल को आठ वर्ष का कारावास, 15 हजार रूपये जुर्माना

 

चांडिल, 30 जनवरी : अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, चांडिल ने एक गंभीर आपराधिक मामले में निर्णय सुनाते हुए नीमडीह थाना क्षेत्र के निवासी अभियुक्त बादल चन्द्र दास को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अभियुक्त को कुल आठ वर्ष के कारावास एवं कुल 15,000 रूपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त सजा तय है। यह फैसला वाद संख्या S.T.-131/23 एवं नीमडीह थाना कांड संख्या 20/23 के तहत पारित किया गया।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सचिन्द्र नाथ सिन्हा के न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 307 भादंवि (हत्या के प्रयास) के अंतर्गत आठ वर्ष के कारावास एवं 10,000 रूपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 324 भादंवि के तहत तीन वर्ष का कारावास एवं 5,000 रुपया जुर्माना लगाया गया है, जबकि जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 341 भादंवि के अंतर्गत एक माह का कारावास तथा धारा 504 भादंवि के तहत एक वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई है। न्यायालय के आदेशानुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। हालांकि, सभी सजाएं साथ साथ चलेगी इसलिए सजायाफ्ता को कुल आठ वर्ष का कारावास व्यतीत करना होगा और निर्धारित जुर्माना भी भरना होगा।

 

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला शिकायतकर्ता आराधना दास के लिखित आवेदन के आधार पर दर्ज किया गया था। घटना के समय शिकायतकर्ता की माता संजीता दास एवं पिता मधुसूदन दास पूजा कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान नीमडीह थाना क्षेत्र के पितकी के समीप, अभियुक्त बादल चन्द्र दास ने जान मारने की नीयत से धारदार लोहे की दाऊली से उन पर कई बार प्रहार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।

घटना के बाद घायलों को तत्काल चांडिल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH), जमशेदपुर रेफर किया गया था। यह मामला वर्ष 2023 का है।

मामले का संचालन प्रभारी अपर लोक अभियोजक हर्ष वर्धन द्वारा किया गया। अभियोजन की ओर से कुल 14 गवाहों की गवाही कराई गई, जिनमें शिकायतकर्ता की घायल माता-पिता, पांच चिकित्सक सहित अन्य प्रत्यक्ष एवं परिस्थितिजन्य गवाह शामिल थे। इसके साथ ही घटना में प्रयुक्त लोहे की दाऊली को भी न्यायालय में भौतिक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया।

न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गावाहों एवं प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर अभियुक्त बादल चन्द्र दास को दोषी पाते हुए उपरोक्त सजाएं सुनाईं।

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