चिलगु में सरकारी जमीन की खुली लूट! 3 एकड़ पर अवैध कब्जा, लाखों टन कचरे का पहाड़ और गैरकानूनी लोहा छन्नी का धंधा बेखौफ जारी

चांडिल, 18 जनवरी : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल अंतर्गत चिलगु गांव में सरकारी भूमि की खुलेआम लूट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खाता संख्या 130 के प्लॉट संख्या 910 में स्थित करीब 3 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि पर बाहरी तत्वों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस जमीन को अवैध धंधों का अड्डा बना दिया गया है, जहां जमशेदपुर शहर से ट्रकों में भरकर कूड़ा-कचरा लाया जा रहा है और खुले में डंप किया जा रहा है।
अब तक लाखों टन कचरा यहां फेंका जा चुका है, जिससे पूरा इलाका जहरीली दुर्गंध की चपेट में है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि आसपास के ग्रामीणों को सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां होने लगी हैं। इसके बावजूद न तो प्रशासन की नजर पड़ी और न ही अब तक कोई ठोस कार्रवाई होती दिख रही है।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। भूमि माफियाओं का दुस्साहस इस कदर बढ़ चुका है कि सरकारी जमीन पर अवैध रूप से क्रशर प्लांट स्थापित कर संचालन किया जा रहा है। विभिन्न कंपनियों के वेस्टेज मेटेरियल को यहां लाकर लोहा/आयरन छन्नी का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। क्रशर में सामग्री की पिसाई के बाद मेग्नेट की मदद से स्लैग से लोहा निकाला जा रहा है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य—दोनों के लिए घातक साबित हो रहा है।
ग्रामीणों की शिकायत पर रविवार को ग्रामप्रधान कामदेव दास के नेतृत्व में पूर्व मुखिया नरसिंह सरदार, करनीडीह के ग्रामप्रधान बहादुर लायक, प्रवीण चंद्र महतो समेत अन्य ग्रामीणों ने स्थल का निरीक्षण किया। जैसे ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे, माफिया गिरोह क्रशर और मशीनें बंद कर मौके से फरार हो गया, जिससे अवैध गतिविधियों की पुष्टि हो गई।
ग्रामप्रधान कामदेव दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी भूमि पर कब्जा कर अनैतिक और गैरकानूनी कार्य किए जा रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अंचलाधिकारी सहित जिले के वरीय अधिकारियों से लिखित शिकायत करने की बात कही और अवैध कब्जा हटाने तथा दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
अब सवाल यह है कि सरकारी जमीन पर वर्षों से चल रहे इस अवैध खेल से प्रशासन अनजान कैसे रहा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी माफियाओं को संरक्षण दे रही है? अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े जन आंदोलन का रूप भी ले सकता है।



