राष्ट्रपति से मिले ‘ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमिटी’ के प्रतिनिधि, ‘हो’ भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

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राष्ट्रपति से मिले ‘ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमिटी’ के प्रतिनिधि, ‘हो’ भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

मानभूम अपडेट्स, प्रतिनिधि – 2 नवम्बर : दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में रविवार को ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमिटी के 12 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट कर जनजातीय ‘हो’ भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की।

बैठक के दौरान राष्ट्रपति ने प्रतिनिधियों से हो भाषा में संवाद किया और विषय पर सकारात्मक चर्चा हुई। इससे पूर्व वर्ष 2023 में भी समिति ने इसी मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था।

राष्ट्रीय अध्यक्ष रामराय मुन्दुईया ने बताया कि देशभर में 50 लाख से अधिक लोग रोज़मर्रा के संचार में ‘हो’ भाषा का प्रयोग करते हैं। वहीं, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सुरा बिरुली ने कहा कि इतनी बड़ी जनजातीय आबादी आज भी अपनी मातृभाषा की संवैधानिक मान्यता से वंचित है, जबकि कम प्रचलित भाषाएँ पहले ही अनुसूची में शामिल हो चुकी हैं।

प्रतिनिधियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही ‘हो’ भाषा को शामिल करने का आश्वासन दे चुके हैं, और झारखंड तथा ओडिशा सरकारें इस संबंध में भारत सरकार को अनुशंसा पत्र भेज चुकी हैं।

बैठक में रामराय मुन्दुईया, सुरा बिरुली, बाजू चंद्र सिरका, गिरीश चंद्र हेम्ब्रोम, शांति सिदु, बसंत बुडीउली, फूलमती सिरका, जगारनाथ केराई, खिरोद हेम्ब्रोम, गोपी लागुरी, गोमिया ओमंग और निकिता बिरुली शामिल थे।

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