जमशेदपुर, 07 अप्रैल : मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता द्वारा सरकारी सुविधाओं के त्याग का निर्णय अब स्थानीय स्तर से निकलकर पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बन गया है। जनसेवा में सादगी और पारदर्शिता का यह उदाहरण लोगों के बीच एक नई सोच को जन्म दे रहा है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह भी चर्चा है कि मेयर सुधा गुप्ता ऐसे परिवार से आती हैं, जहां सार्वजनिक जीवन का लंबा अनुभव रहा है। उनके पति बन्ना गुप्ता राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं और उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न माना जाता है। सुधा गुप्ता द्वारा सरकारी सुविधाओं का त्याग करना लोगों को और अधिक प्रभावित कर रहा है। आम तौर पर देखा जाता है कि जनप्रतिनिधि पद मिलने के बाद मिलने वाली सुविधाओं का उपयोग प्राथमिकता से करते हैं, लेकिन सुधा गुप्ता ने इसके विपरीत जाकर एक अलग मिसाल पेश की है। उन्होंने न केवल सरकारी वाहन और मानदेय का त्याग किया, बल्कि प्रशासनिक खर्चों में कटौती और सादगीपूर्ण कार्यशैली अपनाने का स्पष्ट संदेश भी दिया है। मानगो ही नहीं, बल्कि रांची, धनबाद, बोकारो समेत पूरे झारखंड में उनके इस निर्णय की चर्चा हो रही है। सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों का कहना है कि यह कदम राजनीति में नैतिकता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। कई लोगों का मानना है कि यदि अन्य जनप्रतिनिधि भी इसी प्रकार की सोच अपनाएं, तो न केवल सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा, बल्कि जनता का विश्वास भी शासन-प्रशासन में और अधिक सुदृढ़ होगा। मेयर सुधा गुप्ता का यह कदम अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रहा है, जहां पद से अधिक प्राथमिकता जनसेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को दी जा रही है।