10 करोड़ की सड़क पहली बारिश में बदहाल, 10 महीने में उखड़ गई एनएच-220 की सड़क

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पालीडीह के ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल – उच्चस्तरीय जांच और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग

जमशेदपुर/पोटका, 07 सितंबर : पोटका प्रखंड से सड़क निर्माण में कथित अनियमितता और गुणवत्ता की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-220 पर निर्मित लगभग चार किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण के महज 10 महीने के भीतर ही जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है। पहली ही बारिश में सड़क की बदहाल स्थिति से नाराज पालीडीह के ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान निर्धारित गुणवत्ता मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। यही कारण है कि निर्माण के कुछ ही महीनों बाद सड़क की हालत खराब होने लगी और बारिश के बाद जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे राहगीरों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क के निर्माण के लिए उन्हें वर्षों तक आंदोलन और संघर्ष करना पड़ा था। लंबे इंतजार और लगातार प्रयासों के बाद करीब चार किलोमीटर सड़क का निर्माण हुआ था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सड़क बनने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी, लेकिन करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क 10 महीने भी टिक नहीं सकी।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण सीताराम ने सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में यदि निर्माण कार्य में अनियमितता या गुणवत्ता में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने दोषी पाए जाने पर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में जनता के टैक्स का पैसा खर्च होता है। ऐसे में यदि घटिया निर्माण के कारण सरकारी राशि की बर्बादी होती है तो इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने विभाग से तत्काल सड़क की जांच कराकर गड्ढों की मरम्मत कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

अब ग्रामीणों की शिकायत के बाद संबंधित विभाग इस मामले में कब तक जांच शुरू करता है और सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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