
ईचागढ़ के बड़डीह गांव में जयलाल महतो और उनके बेटे चितरंजन महतो ने अपनी रैयती जमीन का हवाला देते हुए वर्षों पूर्व बनी पीसीसी सड़क पर बांस और झाड़ियां लगाकर बैरियर बना दिया है, जिससे ग्रामीणों का आना-जाना पूरी तरह ठप हो गया है।
ग्रामीणों में उबाल, प्रशासन से की शिकायत
ग्रामीणों ने कई बार सड़क खोलने के लिए जयलाल महतो से आग्रह किया, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया। इसके बाद गांव में बैठक कर अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंप दिया है।
बड़डीह गांव निवासी राजेश कुमार महतो ने बताया कि यह सड़क वर्ष 2013 में पीसीसी ढलाई के साथ बनाई गई थी और अब तक तीन बार मरम्मत भी हो चुकी है। लेकिन अब इस रास्ते के बंद हो जाने से गांव के करीब 40 से 45 परिवार पूरी तरह से अवरुद्ध हो गए हैं। लोगों को मुख्यालय जाने के लिए 30 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। अगर किसी की तबीयत बिगड़ जाए तो इलाज तक समय पर नहीं हो पाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि न केवल बड़डीह बल्कि हुनडीह गांव के लोग भी इस मार्ग से होकर हुटुप की ओर आते-जाते थे, अब उनका रास्ता भी पूरी तरह बंद हो गया है।
तुलग्राम में भी अटका है निर्माण कार्य
उधर, चांडिल प्रखंड अंतर्गत तुलग्राम में प्रस्तावित सड़क निर्माण का एक अन्य मामला सामने आया है। यहां के पितांबर महतो उर्फ पस्तु ने अपनी जमीन को रैयती बताते हुए निर्माण कार्य में बाधा डाली है। बैठक में उसे समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वह सिर्फ इस शर्त पर तैयार हुआ कि सड़क को उसकी जमीन से आगे बनाया जाए। फिलहाल वहां निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
एक ओर जहां एक पुरानी पक्की सड़क को रैयती विवाद के कारण बंद कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर प्रस्तावित सड़क निर्माण भी रुका हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों की नाराज़गी स्वाभाविक है और वे सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार इन विवादों को सुलझाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है।
सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में सड़क निर्माण को लेकर सामने आ रही इन घटनाओं ने ग्रामीण विकास और आवागमन को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन मामलों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और लोगों को राहत मिलती है या नहीं।



