
कहा- हेमंत सरकार में महिलाओं की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं, दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो लाखों महिलाओं के साथ सड़क पर उतरने की दी चेतावनी
कुकडू, 07 नवंबर : आदिवासी एवं युवा नेत्री निशा भगत के निधन को लेकर सरायकेला-खरसावां जिला परिषद की उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने झारखंड की हेमंत सरकार और पुलिस-प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में महिलाओं की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में महिलाएं पुलिस-प्रशासन के भरोसे न रहें, बल्कि अपनी आत्मरक्षा के लिए स्वयं तैयार रहें।
मधुश्री महतो ने कहा कि दिवंगत निशा भगत कोई साधारण महिला नहीं थीं, बल्कि वह झारखंड आंदोलनकारी की बेटी थीं। वह हमेशा भ्रष्टाचार, महिला सशक्तिकरण और जमीन दलालों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाती थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां उत्पन्न हुईं, जिनके कारण निशा भगत को फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी पीड़ा सार्वजनिक करनी पड़ी और अंततः अपनी जान गंवानी पड़ी? उन्होंने इसे सिस्टम की नाकामी बताते हुए राज्य सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप लगाया।
मधुश्री महतो ने दावा किया कि निशा भगत ने आत्महत्या से पहले फोन पर थाना प्रभारी को अपनी परेशानी बताते हुए कहा था कि सिस्टम की नाकामी और कथित प्रताड़ना से तंग आकर वह आत्महत्या करने जा रही हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उनकी जान बचाने के लिए जरूरी पहल नहीं की। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निशा भगत की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह महिलाओं के साथ राज्य सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने को मजबूर होंगी।
मधुश्री महतो ने सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में युवती के साथ कथित दुष्कर्म की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब थाने जैसे सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में ही पुलिसकर्मी पर दुष्कर्म का आरोप लग रहा है, तो आम महिलाएं अपनी सुरक्षा और सम्मान के लिए आखिर कहां जाएं? उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं जागरूक और तैयार होना होगा।
जिला परिषद उपाध्यक्ष ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के ऐसे पदाधिकारियों को भी सरकारी अंगरक्षक उपलब्ध कराए गए हैं, जो किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, जबकि पंचायत चुनाव में निर्वाचित जिला परिषद सदस्यों को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई है। उन्होंने विशेष रूप से महिला जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और महिला जिला परिषद सदस्यों को अंगरक्षक उपलब्ध कराने की मांग की।
मधुश्री महतो ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकारी दावों से सुनिश्चित नहीं होगी। इसके लिए सरकार और पुलिस-प्रशासन को जवाबदेह बनाना होगा।



