स्वर्णरेखा परियोजना में जड़ जमाए भ्रष्टाचार का ‘टाइपिस्ट चेहरा’ : 20 वर्षों से जमे प्रसेनजीत घोष पर विस्थापितों का हक छीनने का गंभीर आरोप – झारखंड मानवाधिकार संघ के अध्यक्ष ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

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स्वर्णरेखा परियोजना में जड़ जमाए भ्रष्टाचार का ‘टाइपिस्ट चेहरा’ : 20 वर्षों से जमे प्रसेनजीत घोष पर विस्थापितों का हक छीनने का गंभीर आरोप – झारखंड मानवाधिकार संघ के अध्यक्ष ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

जमशेदपुर/आदित्यपुर, 29 जुलाई , संवाददाता : स्वर्णरेखा बहुउद्देश्यीय परियोजना में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। झारखंड मानवाधिकार संघ के अध्यक्ष दिनेश कुमार किनू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आदित्यपुर परियोजना कार्यालय में वर्षों से जमे टंकक प्रसेनजीत घोष के माध्यम से पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने प्रसेनजीत घोष को “पूरे सरकार पर भारी” बताते हुए आरोप लगाया है कि उक्त कर्मचारी विस्थापितों के अधिकारों की लगातार अनदेखी कर रहा है और भ्रष्टाचार की जड़ में बैठा है।

दिनेश कुमार किनू का दावा है कि टंकक प्रसेनजीत घोष पिछले 20 वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जबकि उनके मूल विभाग बांध एवं बराज रूपांकन प्रमंडल, जमशेदपुर में स्थानांतरण का आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सरकार के अवर सचिव तक ने 2016 से कई बार जारी किया है। किनू का आरोप है कि घोष हर बार इन आदेशों को ‘दबा’ देते हैं और अधिकारी ‘मौन धारण’ कर लेते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक साधारण टंकक के पास इतनी ताकत कैसे है कि वह शासन के आदेशों को भी ठेंगा दिखा देता है।

विस्थापितों के अधिकारों की खुली लूट!

मानवाधिकार संघ के अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि घोष परियोजना से विस्थापित हुए परिवारों के अधिकारों की खुलेआम लूट कर रहे हैं और करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर चुके हैं। किनू ने कहा, “हमने संबंधित तमाम विभागों में उनकी शिकायत की है, हर जगह से कार्रवाई का आदेश आया है, लेकिन आज तक उन्हें उनके पद से हटाया नहीं गया। यह सरकारी तंत्र की असफलता ही नहीं, बल्कि एक आम आदमी की न्याय व्यवस्था पर सीधी चोट है।”

घोष पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार का संगीन आरोप

दिनेश कुमार किनू का आरोप है कि प्रसेनजीत घोष सिर्फ टंकक नहीं, बल्कि सुवर्णरेखा परियोजना में फैले भ्रष्टाचार के एक ‘संगठित तंत्र’ का अहम हिस्सा हैं। वह अवैध वसूली कर ऊपर तक हिस्सा पहुंचाते हैं, इसीलिए हर कार्रवाई फाइलों में दबी रह जाती है। किनू ने कहा कि एक अदना सा कर्मचारी अगर पूरे सिस्टम को हिला सकता है, तो सोचिए कि इस तंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं।

जांच की मांग, कार्रवाई की चुनौती

मानवाधिकार संघ ने प्रसेनजीत घोष के खिलाफ उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही यह चेतावनी दी है कि यदि अब भी सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती, तो आंदोलनात्मक रास्ता अपनाया जाएगा। दिनेश कुमार किनू ने यह भी कहा, “हम सिर्फ घोष नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले हर अधिकारी को बेनकाब करेंगे।”

स्वर्णरेखा परियोजना का उद्देश्य जहां विकास और विस्थापितों का पुनर्वास था, वहीं आज उस परियोजना में ही विस्थापितों की पीड़ा और भ्रष्टाचार का अंधेरा घर कर चुका है। यदि एक टंकक सरकारी आदेशों को धता बताते हुए दो दशकों तक कुर्सी पर टिका रह सकता है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का सवाल है। यह मामला झारखंड सरकार के लिए एक नजीर साबित हो सकता है — अगर ईमानदार कार्रवाई हो।

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति और मानवाधिकार संघ द्वारा साझा किए गए तथ्यों पर आधारित है। सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया मिलते ही उसे भी शामिल किया जाएगा।

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