आदित्यपुर : वार्ड-29 में विरासत की राजनीति, अर्चना सिंह की एंट्री से खत्म हुआ सस्पेंस

आदित्यपुर, 18 जनवरी : नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में वार्ड संख्या–29 से एक अहम और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है, जिसने लंबे समय से चले आ रहे सस्पेंस पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।
निवर्तमान पार्षद स्वर्गीय राजमणि देवी के बड़े पुत्र मनमोहन सिंह ने अपनी पत्नी अर्चना सिंह को वार्ड-29 से चुनावी मैदान में उतारने की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस ऐलान के साथ ही न केवल वार्ड-29, बल्कि पूरे आदित्यपुर नगर निगम चुनाव की राजनीति और अधिक दिलचस्प हो गई है।
स्व. राजमणि देवी के असामयिक निधन के बाद से यह चर्चा का विषय बना हुआ था कि उनकी राजनीतिक विरासत को आगे कौन बढ़ाएगा। मनमोहन सिंह स्वयं चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, लेकिन परिसीमन के बाद वार्ड-29 के महिला आरक्षित हो जाने से समीकरण बदल गए। इसके बाद से क्षेत्र में संशय और अटकलों का दौर जारी था।
अर्चना सिंह के चुनावी समर में उतरने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि दिवंगत पार्षद की राजनीतिक विरासत को अब उनका परिवार ही आगे बढ़ाएगा। उल्लेखनीय है कि आदित्यपुर में शहरी निकाय चुनाव की शुरुआत से लेकर अब तक स्व. राजमणि देवी लगातार पार्षद चुनी जाती रही थीं और उन्होंने राज्य में सबसे अधिक मतों से पार्षद निर्वाचित होने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया था।
वर्तमान कार्यकाल के दौरान उनके निधन से वार्ड में एक गहरा भावनात्मक शून्य पैदा हो गया था। क्षेत्र की जनता लंबे समय से उनके परिवार के किसी सदस्य के राजनीति में उतरने की उम्मीद लगाए बैठी थी। अब बड़ी बहू अर्चना सिंह के मैदान में उतरने से इन उम्मीदों को नई दिशा मिली है।
मनमोहन सिंह ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज के माध्यम से वार्डवासियों से अपील करते हुए कहा है कि वे उनकी दिवंगत मां के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए अर्चना सिंह को समर्थन दें। गौरतलब है कि स्व. राजमणि देवी भले ही भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रही हों, लेकिन उनकी छवि दलगत राजनीति से ऊपर रही। उन्हें सभी राजनीतिक दलों और आम जनता का समान रूप से स्नेह और सम्मान प्राप्त था।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने वार्ड के विकास के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए, जिन्हें आज भी क्षेत्र की जनता याद करती है। ऐसे में वार्ड-29 का यह चुनाव इस बार केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि भावनाओं, विश्वास और विरासत का चुनाव बनता नजर आ रहा है।



