“जनजाति सांस्कृतिक समागम” का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन 24 को चाईबासा में
चाईबासा, 22 मई : राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के लाल किला मैदान में 24 मई 2026 को होने वाले ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ का कोल्हान में विरोध किया जा रहा है। कोल्हान के मुख्यालय चाईबासा शहर में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों के द्वारा 24 मई को बहिष्कार के लिए एक दिवसीय सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस संबंध में विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों का कहना है कि के पीछे क्या सिर्फ सांस्कृतिक उद्देश्य है या कोई बड़ा राजनीतिक एजेंडा?
विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों ने अपील में कहा है कि समागम का मूल सोच आदिवासी विरोधी है। जनजाति सुरक्षा मंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) व वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़ा एक संगठन है। इनका मानना है कि आदिवासी हिंदू हैं एवं वर्ण व्यवस्था का हिस्सा हैं। इसलिए ये कभी आदिवासी शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं और आदिवसियों को हिंदू वर्ण व्यवस्था में आखरी पायदान में खड़े जनजाति और वनवासी के रूप में देखते हैं।
ये संगठन एक ओर “सरना-सनातन एक” बोलकर आदिवासियों के स्वतंत्र अस्तित्व को खत्म करने में लगे हैं। वहीं दूसरी ओर, ईसाई आदिवासियों की आदिवासी सूची से डिलिस्टिंग की मांग कर आदिवासियों की सामूहिकता को तोड़ने में लगे हैं। यह संगठन सरना कोड के विरोधी भी हैं। ये संगठन कभी भी आदिवासियों की जल, जंगल, जमीन की लड़ाई में साथ नहीं आए हैं। इनकी कोशिश है कि यहां के आदिवासियों के स्वतंत्र अस्तित्व को खत्म किया जाए।
जनजाति सांस्कृतिक समागम भी इसी दिशा में साजिश है। इसलिए राज्य भर में समाज के जाने-माने लोग आदिवासियों से अपील किए हैं कि वे 24 मई को होने वाले जनजाति सांस्कृतिक समागम एवं इसके आयोजक जनजाति सुरक्षा मंच का पूर्ण रूप से बहिष्कार करें। साथ ही, विरोध दर्ज करने के लिए सभा चर्चाओं आदि जन कार्यक्रमों का आयोजन करें। प्रमुख झारखंडियों ने राज्य के आदिवासियों से जनजाति सांस्कृतिक समागम के बहिष्कार करने की अपील की है।