ओल चिकी लिपि शताब्दी वर्ष पर संथाल समाज का सम्मान, सामाजिक कार्यकर्ता सत्य नारायण मुर्मु हुए सम्मानित

जमशेदपुर, 15 मार्च : संथाली भाषा की पहचान और गौरव की प्रतीक ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नई दिल्ली स्थित Dr. Ambedkar International Centre में 15–16 फरवरी 2026 को भव्य दो दिवसीय शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया।
ओल चिकी लिपि के जनक Raghunath Murmu द्वारा वर्ष 1925 में रचित इस लिपि ने संथाली भाषा को एक संगठित स्वरूप और नई पहचान दिलाई। समारोह का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि ओल चिकी लिपि केवल एक लेखन प्रणाली नहीं, बल्कि संथाल समाज की सांस्कृतिक अस्मिता, आत्मसम्मान और परंपरा का सशक्त प्रतीक है।
इस अवसर पर गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मु के चित्र के साथ ओल चिकी लिपि अंकित 100 रुपये का स्मारक सिक्का और 5 रुपये का विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया, जिसने पूरे देश के संथाल समाज को गौरवान्वित किया।
कार्यक्रम के दौरान ओल चिकी लिपि के शिक्षण, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले 100 चयनित व्यक्तियों को सम्मानित करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि समयाभाव के कारण राष्ट्रपति के हाथों केवल कुछ ही लोगों को सम्मानित किया जा सका। शेष चयनित व्यक्तियों को सम्मानित करने की जिम्मेदारी फागुन पत्रिका के आयोजकों को सौंपी गई।
इसी क्रम में पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला स्थित Dhad Dishom Majhi Pargana Mahal में आयोजित कार्यक्रम में चांडिल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सत्य नारायण मुर्मु को ओल चिकी लिपि के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें प्रमाण पत्र, मोमेंटो, विशेष डाक टिकट, फागुन पत्रिका तथा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मान प्राप्त करने के बाद सत्य नारायण मुर्मु ने कहा कि संथाल समाज का इतिहास संघर्ष, बलिदान और सांस्कृतिक गौरव से भरा हुआ है। उन्होंने Tilka Manjhi, Sidhu Murmu, Kanhu Murmu सहित कई महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे संथाल समाज और क्षेत्र का सम्मान है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन्हें अपनी मातृभाषा, ओल चिकी लिपि और संथाल संस्कृति के संरक्षण व प्रचार-प्रसार के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देती है।



