“रात में बालू का खेल, दिन में कार्रवाई का ढोल – सरायकेला-खरसावां में खनन विभाग बेअसर!”

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“रात में बालू का खेल, दिन में कार्रवाई का ढोल – सरायकेला-खरसावां में खनन विभाग बेअसर!”

चांडिल, 11 फ़रवरी : जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में अवैध बालू खनन और उसका परिवहन बेखौफ जारी है। खासकर ईचागढ़ एवं तिरुलडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत स्वर्णरेखा नदी से रात के अंधेरे में सैकड़ों वाहनों के जरिए बालू का उठाव और परिवहन खुलेआम किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि मानो नियम-कानून का कोई अस्तित्व ही न हो।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हर रात दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों वाहन नदी घाटों के साथ साथ स्टॉक से बगैर चालान से बालू लादकर विभिन्न स्थानों की ओर रवाना होते हैं। इससे जहां एक ओर सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है, वहीं दूसरी ओर स्वर्णरेखा नदी के अस्तित्व और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ खनन विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग द्वारा समय-समय पर कार्रवाई के नाम पर एक-दो वाहनों को पकड़कर खानापूर्ति कर ली जाती है, लेकिन बड़े पैमाने पर चल रहे इस अवैध कारोबार पर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती। यह स्थिति विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

गौरतलब है कि जिले के उपायुक्त लगातार अवैध खनन और खनिज परिवहन पर सख्ती बरतने के निर्देश दे रहे हैं। उनकी मंशा स्पष्ट है कि जिले में अवैध खनन पर पूर्ण विराम लगे, पर्यावरण की रक्षा हो और सरकारी राजस्व की क्षति रोकी जाए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर खनन विभाग की निष्क्रियता प्रशासनिक निर्देशों को ठेंगा दिखाती प्रतीत हो रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध बालू परिवहन पर रोक लगाने के उद्देश्य से चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में जो चेक पोस्ट स्थापित किए गए थे, उनका क्या हुआ? क्या वे महज कागजी व्यवस्था बनकर रह गए हैं?

हम अपनी अगली रिपोर्ट में करेंगे खुलासा — “अवैध बालू रोकथाम के लिए बने चेक पोस्ट का पोस्टमार्टम”

जिसमें बताएंगे कि आखिर सुरक्षा और निगरानी के नाम पर बनाए गए ये चेक पोस्ट क्यों बेअसर साबित हो रहे हैं।

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