चांडिल : सरकारी योजनाओं से अब भी वंचित आदिम जनजाति परिवार, सड़क और राशन वितरण व्यवस्था बनी बड़ी बाधा

मानभूम अपडेट्स, डेस्क ,27 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिले के अंतिम छोर पर स्थित चांडिल प्रखंड अंतर्गत कदमझोर गांव के सबर परिवार (आदिम जनजाति) आज भी सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। आदिम जनजाति समुदाय के संरक्षण और विकास के लिए राज्य सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वातानुकूलित कमरों में योजनाएं बन रही हैं और उनकी समीक्षा भी की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन योजनाओं का लाभ कई वास्तविक लाभुकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि, वर्तमान में जिले के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह इन विषयों पर बहुत ही गंभीर है। जब मामला आदिम जनजाति एवं आदिवासी समुदाय से जुड़ा हो तो वे बहुत ही संवेदनशील हो जाते हैं और बारीकी से मामलों की जांच करते हैं। लेकिन शायद जिले के अन्य अधिकारी उपायुक्त के उद्देश्यों पर पानी फेरना चाहते हैं?

कदमझोर के सबर टोला तक जाने के लिए आज भी पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी दयनीय हो जाती है, जब कच्ची सड़क पर आवागमन लगभग असंभव हो जाता है। सुगम मार्ग के अभाव में आदिम जनजाति परिवार सरकारी योजनाओं और बुनियादी सेवाओं से वंचित रह जाते हैं। विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य यहां की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इसके अलावा, वर्ष 2016 में शुरू की गई महत्वाकांक्षी पीवीटीजी डाकिया मुख्यमंत्री खाद्य सुरक्षा योजना भी इन परिवारों तक नहीं पहुंच पाई है। योजना के तहत आदिम जनजाति परिवारों को उनके घर तक बंद बोरा में 35 किलो चावल पहुंचाना था, ताकि उन्हें राशन लेने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। लेकिन कदमझोर के सबर परिवारों को अब भी सात किलोमीटर दूर चाकुलिया गांव स्थित डीलर के पास जाना पड़ता है। इससे सरकार की योजना का उद्देश्य ही विफल हो रहा है।

स्थानीय लोग बताते हैं कि अगर प्रखंड विकास पदाधिकारी स्वयं सबर टोला का औचक निरीक्षण करें तो वास्तविकता सामने आएगी और लाभकारी योजनाओं का धरातलीय आकलन हो सकेगा। आदिम जनजातियों की समस्याओं के समाधान के लिए सड़क संपर्क सुधारने, राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और सक्रिय निगरानी तंत्र विकसित करने की सख्त आवश्यकता है।
आदिम जनजाति समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ना केवल सरकारी दस्तावेजों और योजनाओं में सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर इनके जीवन में सुधार लाने के लिए ठोस पहल आवश्यक है। कदमझोर के सबर परिवारों की स्थिति इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि बिना सक्रिय निगरानी और जवाबदेही के विकास की गाड़ी यहां तक नहीं पहुंच पाएगी।



