अवैध बालू खनन पर गरमाई सियासत – विधायक अमित महतो धरने पर बैठे, कई वाहन जब्त, जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो भी पहले कर चुकी हैं कार्रवाई

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अवैध बालू खनन पर गरमाई सियासत – विधायक अमित महतो धरने पर बैठे, कई वाहन जब्त, जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो भी पहले कर चुकी हैं कार्रवाई

 

सिल्ली/रांची, 18 जुलाई  : झारखंड में अवैध बालू खनन को लेकर सियासत गरमा गई है। सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के विधायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेता अमित महतो ने राहे थाना क्षेत्र के एक बालू घाट पर अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार देर रात से विधायक अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से बालू का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।

जब पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचकर उन्हें समझाने का प्रयास करने लगे, तो विधायक महतो आक्रोशित हो उठे और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कार्यवाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें आश्वस्त किया कि बालू तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विधायक के समर्थकों ने एक हाईवा और 8 से 10 ट्रैक्टरों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। अब पुलिस स्थानीय सीओ के आने का इंतजार कर रही है ताकि इस अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की जा सके।

सूत्रों के अनुसार एक हाईवा, एक टर्बो, एक बालू लदा ट्रैक्टर, एक खाली ट्रैक्टर, चार JSB मेटल ट्रैक्टर और एक जेसीबी मशीन को पुलिस ने जब्त किया है।

यह कोई पहला मामला नहीं है—पहले भी हो चुकी है जनप्रतिनिधियों की सक्रिय कार्रवाई

ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले ही सरायकेला-खरसावां जिला परिषद की उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने भी नीमडीह थाना क्षेत्र के सिरूम चौक पर अवैध बालू लदे दो हाईवा को ग्रामीणों के सहयोग से पकड़ा था। खनन विभाग ने जांच में वैध कागजात न मिलने पर उन दोनों वाहनों को सीज कर दिया था।

मधुश्री महतो की इस कार्रवाई के बाद अवैध बालू कारोबार से जुड़े सिंडिकेट और उन पर पलने वाले कुछ तथाकथित लोग जनप्रतिनिधियों को उनके “दायित्व और अधिकार” का पाठ पढ़ाने लगे थे। अब जब विधायक अमित महतो ने भी इसी तरह की पहल की है, तो सवाल उठता है—क्या अब वही लोग उन्हें भी उनके अधिकार और सीमाओं की जानकारी देने सामने आएंगे?

अवैध खनन के खिलाफ जनप्रतिनिधियों की सक्रियता यह दर्शा रही है कि बालू माफिया की काली कमाई के खिलाफ प्रशासन और राजनीति में ईमानदार आवाजें उठ रही हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इन जनप्रतिनिधियों के सहयोग से किस हद तक ठोस कार्रवाई करता है, या यह विरोध भी केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

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