

नीमडीह : आंगनबाड़ी सेविका चयन पर बवाल, द्वितीय पेपर के अंकों ने खड़े किए गंभीर सवाल
नीमडीह, 20 अगस्त : सरायकेला खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत झिमड़ी गांव के दक्षिण भाग आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका चयन की प्रक्रिया पूरी होते ही विवाद खड़ा हो गया है। छह अभ्यर्थियों के बीच दस्तावेजों के आधार पर हुई चयन प्रक्रिया में नमिता महतो को सर्वाधिक 29 अंक मिलने पर चयनित घोषित किया गया, लेकिन अब उनकी मार्कशीट में परीक्षा के द्वितीय पेपर के अंक दर्ज नहीं होने का मामला सवालों के घेरे में है। आपत्ति जताने वाले अभ्यर्थियों ने पूरे दस्तावेजों की पुनः और निष्पक्ष सत्यापन की मांग की है।

चयन प्रक्रिया को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर किसी अभ्यर्थी को मेरिट में बढ़त मिली, उसकी प्रमाणिकता और पूर्णता की जांच चयन से पहले कितनी गंभीरता से हुई? यदि मार्कशीट में द्वितीय पेपर के अंक दर्ज नहीं हैं तो उसके आधार पर अंक निर्धारित करने की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्टता जरूरी है। हालांकि, इस संबंध में अभी किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


चयन में शामिल अभ्यर्थी मालती महतो ने आरोप लगाया कि संबंधित परीक्षा का द्वितीय पेपर बाद में आयोजित हुआ था और चयनित अभ्यर्थी की मार्कशीट में इसके अंक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास परीक्षा की तिथि समेत संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और वह पूरे मामले की जांच की मांग करेंगी। उनका सवाल है कि यदि मार्कशीट पूर्ण और वैध है तो परीक्षा की तिथि और परिणाम से जुड़ी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है।

पंचायत समिति सदस्य पद्मलोचन महतो ने भी आपत्तियों को गंभीर बताते हुए दस्तावेजों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सत्यापन में किसी प्रमाणपत्र में कमी या विसंगति मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।





वहीं बीडीओ ने स्पष्ट किया कि विभागीय संकल्प संख्या 2239 के प्रावधानों के तहत उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अंक दिए गए हैं। नमिता महतो को 29 अंक मिले हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चयन अभी अंतिम नियुक्ति नहीं है। मार्कशीट, प्रमाणपत्र, जाति एवं आवासीय प्रमाणपत्र समेत सभी दस्तावेजों का अधिकृत स्तर पर सत्यापन कराया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर चयन रद्द किया जा सकता है।
अब निगाहें दस्तावेज सत्यापन पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ एक अभ्यर्थी के चयन का नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता का है।
ग्रामीणों ने अंततः निर्णय लिया है कि यदि प्रखंड स्तर से मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होता है तो वे जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर राज्य स्तर तक लिखित शिकायत करेंगे।

























