रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और सांसद विद्युत वरण महतो ने किया रांची–टाटा राष्ट्रीय राजमार्ग पुनर्निर्माण कार्य का शिलान्यास

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चांडिल, 18 जून : झारखंड के बहुप्रतीक्षित रांची–टाटा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-33) के पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का गुरुवार को विधिवत भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत चौका स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे आयोजित कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ तथा जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने संयुक्त रूप से परियोजना का शुभारंभ किया।

केंद्र सरकार द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹214.79 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। करीब 127 किलोमीटर लंबी इस ओवरले परियोजना के तहत रांची से जमशेदपुर तक सड़क का पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाएगा, जिससे लाखों यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।

शिलान्यास कार्यक्रम में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और आम नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान उपस्थित लोगों ने सड़क निर्माण कार्य के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि रांची–टाटा मार्ग झारखंड की आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा है। लंबे समय से इसकी जर्जर स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। केंद्र सरकार ने जनहित को प्राथमिकता देते हुए इसके पुनर्निर्माण को मंजूरी दी है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से रांची और जमशेदपुर के बीच यात्रा अधिक सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध होगी। साथ ही उद्योग, व्यापार, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।

परियोजना के तहत क्षतिग्रस्त सड़क की परत को हटाकर आधुनिक तकनीक से नई डामर परत बिछाई जाएगी। कार्य का निष्पादन भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों के अनुरूप किया जाएगा, जिससे सड़क की गुणवत्ता और टिकाऊपन सुनिश्चित हो सके।

स्थानीय लोगों ने परियोजना के शुभारंभ का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा होने पर क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी और रांची–जमशेदपुर कॉरिडोर में आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

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