दलमा की गोद में ममता: सुखी टुडू ने नन्हे हाथी को पिलाया दूध, इंसानियत हुई जीवित
चांडिल, 08 फरवरी : दलमा वाइल्ड लाइफ अभयारण्य की पहाड़ियों ने रविवार को सिर्फ जंगल की खामोशी नहीं ओढ़ी थी, बल्कि वहां करुणा की धड़कन भी साफ़ सुनाई दे रही थी। दिवंगत आंदोलनकारी साथी कपूर बागी की मां और दिशोम गुरु दिवंगत शिबू सोरेन की बहन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बुआ सुखी टुडू ने जब अपने कांपते हाथों से एक नन्हे हाथी के बच्चे को दूध पिलाया, तो वह दृश्य इंसान और प्रकृति के रिश्ते को नई परिभाषा दे गया।
अनाथ सा भटकता वह हाथी का बच्चा केवल भूखा नहीं था, उसकी आंखों में डर और असहायपन झलक रहा था। वहीं सुखी टुडू की आंखों में वही ममता थी, जो किसी मां के दिल से बहती है, जो न जाति देखती है, न प्रजाति। उस क्षण न कोई बड़ा था, न कोई छोटा। एक ओर जीवन की जरूरत थी, तो दूसरी ओर निस्वार्थ प्रेम।
दिवंगत कपूर बागी ने अपने जीवन में अन्याय और शोषण के खिलाफ़ संघर्ष किया। आज उनकी मां के हाथों से झरती यह ममता उसी संघर्ष की सबसे मानवीय विरासत बनकर सामने आई। यह दृश्य बताता है कि क्रांति केवल नारों से नहीं, करुणा से भी जन्म लेती है।
दिशोम गुरुजी की बहन सुखी टुडू ने इस छोटे से कार्य से आदिवासी दर्शन का गहरा संदेश दिया, जहां जंगल मां है और उसका हर जीव संतान। जब दुनिया दिन-ब-दिन कठोर होती जा रही है, जब जंगल उजाड़े जा रहे हैं, ऐसे समय में दलमा से उभरा यह दृश्य हमारे भीतर सोई इंसानियत को जगाता है।
वह नन्हा हाथी सिर्फ़ दूध नहीं पी रहा था, वह भरोसा पी रहा था, वह जीवन पी रहा था। और हम सब यह सीख रहे थे कि अगर इंसान चाहे, तो वह भगवान नहीं, मां बन सकता है। जल-जंगल-जमीन की रक्षा ही सबसे बड़ी इबादत है।