मंईयां सम्मान योजना : पूर्वी सिंहभूम में सत्यापन के दौरान 6700 लाभुक पते पर नहीं मिले, भुगतान पर लगी रोक

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जमशेदपुर, 14 जून : झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत पूर्वी सिंहभूम जिले में चल रहे लाभुक सत्यापन अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा कराए जा रहे भौतिक सत्यापन में करीब 6700 लाभुक अपने दर्ज पते पर नहीं मिले, जिसके बाद उनके खातों में योजना की राशि के भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में योजना से जुड़े लाभुकों का लगभग 90 प्रतिशत सत्यापन कार्य पूरा किया जा चुका है। जांच के दौरान कुछ लाभुकों का पता सत्यापित नहीं हो सका, जबकि कुछ मामलों में लाभुक योजना की निर्धारित पात्रता की शर्तों पर खरे नहीं उतरे। ऐसे मामलों को चिन्हित कर भुगतान प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकने की कार्रवाई की जा रही है।

सामाजिक सुरक्षा विभाग ने योजना के सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई लाभुक सत्यापन में अनुपस्थित पाया जाता है अथवा अपात्र घोषित होता है, तो प्रखंड स्तर से ही उसके भुगतान को होल्ड करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही संबंधित जानकारी जिला मुख्यालय को भेजी जा रही है, ताकि अभिलेखों को अद्यतन रखा जा सके।

2.86 लाख पात्र लाभुकों को जल्द मिलेगी राशि

दूसरी ओर, जिले के लगभग 2 लाख 86 हजार पात्र लाभुकों के खातों में सोमवार से 2500-2500 रुपये की राशि हस्तांतरित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। यह भुगतान अप्रैल माह की किस्त के रूप में किया जाएगा। विभागीय निर्देश प्राप्त होने के बाद मई माह की किस्त भी जारी किए जाने की संभावना है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इसके लिए जिले को अतिरिक्त एक माह का आवंटन भी उपलब्ध है।

योजना के तहत पहले से जमा नए आवेदनों पर फिलहाल कोई नया निर्देश जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद ही नए आवेदनों की डेटा एंट्री और अन्य प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जाएंगी। इससे बड़ी संख्या में नए आवेदकों को प्रतीक्षा करनी पड़ रही है और वे जानकारी के लिए प्रखंड, अंचल एवं जिला कार्यालयों का रुख कर रहे हैं।

जिला प्रशासन का कहना है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक एवं पात्र लाभुकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अपात्र लाभुकों की पहचान करने तथा भुगतान प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए आगे भी जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहेगी।

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