कुड़मी समाज ने झारखंड, बंगाल और ओडिशा में सौ जगहों पर करेंगी अनिश्चितकालीन रेल टेका

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कुड़मी समाज ने झारखंड, बंगाल और ओडिशा में सौ जगहों पर करेंगी अनिश्चितकालीन रेल टेका


चांडिल, 14 सितंबर : आदिवासी कुड़मी समाज द्वारा 20 सितंबर 2025 को झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सौ जगहों पर रेल टेका आंदोलन करेगा। इसको लेकर आदिवासी कुड़मी समाज के संयोजक मूलखूंटी मूलमांता अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि यह आंदोलन केवल विरोध नहीं बल्कि समाज के आदिवासी अस्मिता, इतिहास और न्याय की पुनः स्थापना का महासंग्राम है। आंदोलन को लेकर रविवार को डाक बंगला चांडिल में बैठक हुई। बैठक में चांडिल-मुरी रेलखंड पर तीन जगहों पर और चांडिल व गम्हरिया के बीच दो जगहों पर अनिश्चितकालीन रेल टेका करने की निर्णय लिया गया।

समाज की पहचान, भाषा, पर्व और संस्कृति बचाने की जंग

अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि एक राजनीतिक साजिश के तहत 6 सितंबर 1950 को कुडमी समाज को एसटी सूची से हटा दिया गया। लेकिन कानून और इतिहास दोनों गवाही देते हैं कि हम आदिवासी थे, हैं और रहेंगे। सीएनटी एक्ट कुड़मी समाज पर भी लागू है, जो इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि सरकार और कानून ने समाज को आदिवासी माना है। उन्होंने कहा कि आज जो लोग विरोध कर रहे हैं, वे असली आदिवासी संगठन नहीं, बल्कि स्वार्थी व्यक्ति और अवसरवादी नेता हैं, जो जनता को गुमराह करके अपना राजनीतिक कैरियर चमकाना चाहते हैं।

समाज के अस्मिता की अंतिम पुकार

उन्होंने पूरे समाज से आह्वान किया कि 20 सितंबर का झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सौ जगह पर अनिश्चितकालीन रेल टेका आंदोलन समाज के अस्मिता की अंतिम पुकार है। यह आंदोलन तय करेगा कि आने वाली पीढ़ियां हमें कायर कहेंगी या योद्धा। अब हर कुडमी को अपनी पूरी ताकत, अपने खून और पसीने से इस लड़ाई को सफल बनाना होगा। यह केवल आंदोलन नहीं, बल्कि पूर्वजों के बलिदान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सौगंध है। इस अवसर विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में कुड़मी समाज के लोग उपस्थित थे।

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