झारखंड पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी: 15 लाख के इनामी नक्सली मार्टिन केरकेट्टा मुठभेड़ में ढेर, दिनेश गोप का करीबी था

रांची/गुमला ,संवाददाता,6 अगस्त : झारखंड के गुमला जिले में पुलिस को मंगलवार देर रात नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता हाथ लगी। पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (PLFI) के शीर्ष कमांडर और 15 लाख रुपये के इनामी उग्रवादी मार्टिन केरकेट्टा को पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। मार्टिन न केवल संगठन की केंद्रीय समिति का सदस्य था, बल्कि कुख्यात नक्सली दिनेश गोप का करीबी और उत्तराधिकारी भी था।
गुप्त सूचना पर की गई इस सटीक कार्रवाई में गुमला पुलिस, नक्सल क्यूआरटी और स्थानीय थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कामडारा थाना क्षेत्र के चंगाबाड़ी ऊपरटोली इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। जैसे ही पुलिस टीम ने इलाके को घेरा, उग्रवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में मुठभेड़ के दौरान मार्टिन केरकेट्टा मारा गया।
गुमला के पुलिस अधीक्षक (SP) हरीश बिन जमा ने बताया कि विश्वसनीय खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई थी। उन्होंने बताया कि मार्टिन लंबे समय से संगठन को पुनः सक्रिय करने में लगा था और दिनेश गोप की गिरफ्तारी के बाद उसने PLFI की कमान संभाल ली थी।
दिनेश गोप का उत्तराधिकारी बना था मार्टिन
बताया जा रहा है कि मार्टिन केरकेट्टा और दिनेश गोप बचपन के दोस्त थे। दोनों ने रांची जिले के लापुंग प्रखंड स्थित महुगांव के एक स्कूल में साथ पढ़ाई की थी और बाद में मिलकर उग्रवादी गतिविधियों की दुनिया में कदम रखा। दिनेश गोप की गिरफ्तारी के बाद मार्टिन को संगठन की कमान सौंपी गई थी। उसने कई जिलों में रंगदारी, लेवी वसूलने और सुरक्षाबलों पर हमले जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था।
राज्य सरकार ने उसकी बढ़ती गतिविधियों और खतरे को देखते हुए उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस के अनुसार, मार्टिन की मौत से PLFI की कमर टूट गई है और नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
ग्रामीणों में राहत, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
मुठभेड़ के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पूरे क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि संगठन के अन्य सदस्यों की मौजूदगी का पता लगाया जा सके। इस कार्रवाई से नक्सल प्रभावित ग्रामीणों में भी राहत और सुरक्षा की भावना देखी जा रही है।
गुमला पुलिस ने कहा है कि यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा और नक्सलवाद के समूल उन्मूलन तक कार्रवाई की गति धीमी नहीं होगी।



