चांडिल में ‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’, अंधविश्वास और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ बुलंद हुई आवाज
चांडिल, 30 सितंबर : देश में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने, अंधविश्वास और छद्म विज्ञान के खिलाफ जागरूकता फैलाने तथा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में पर्याप्त निवेश की मांग को लेकर 12 सितंबर को चांडिल में ‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ का आयोजन किया गया। ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी के झारखंड चैप्टर के तत्वावधान में आयोजित मार्च में स्कूली बच्चों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और विज्ञान प्रेमियों ने भाग लिया।
मार्च के दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में विभिन्न मांगों और संदेशों से संबंधित तख्तियां लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने की अपील की। आयोजकों ने कहा कि विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन समाज में अंधविश्वास और अवैज्ञानिक दावों को बढ़ावा मिलना चिंता का विषय है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी साक्ष्य आधारित नीतियां लागू करने की मांग उठाई।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था में वैज्ञानिक चेतना और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने, पाठ्यक्रम में अंधविश्वास और अप्रमाणित दावों को शामिल नहीं करने तथा संविधान के अनुच्छेद 51ए(एच) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया गया। आयोजकों ने पाठ्यक्रमों में किए जा रहे बदलावों पर भी सवाल उठाए।
आंदोलन के माध्यम से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की गई। आयोजकों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त करने तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग रखी।
इसके अलावा शिक्षा के लिए केंद्रीय बजट का कम से कम 10 प्रतिशत और राज्य बजट का 30 प्रतिशत आवंटित करने, सरकारी स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थिति सुधारने तथा विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की गई। अनुसंधान क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कम से कम 3 प्रतिशत करने और शोधार्थियों की फेलोशिप में होने वाली देरी दूर करने की भी मांग रखी गई।
अंधविश्वास, डायन प्रथा, मानव बलि और फर्जी आस्था आधारित उपचार के नाम पर होने वाले शोषण को रोकने के लिए देशव्यापी एंटी-ब्लैक-मैजिक कानून बनाने की मांग भी मार्च में उठाई गई।
मार्च के समापन पर ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी झारखंड चैप्टर की राज्य सचिव मंडली के सदस्य एवं यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स, रांची के रिसर्च स्कॉलर अनंत कुमार महतो ने कहा कि “विज्ञान की रक्षा ही हमारे सामूहिक भविष्य की रक्षा है।” उन्होंने कहा कि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक करने की बात कही गई है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विज्ञान शिक्षक जयदीप प्रमाणिक, अमृता महतो, पूजा प्रमाणिक, खुशबू महतो, बुद्धेश्वर कुंभकार, रामनाथ कुंभकार, मनीष महतो, त्रिलोचन महतो, कार्तिक महतो, कुणाल सिंह सरदार सहित अन्य साथियों की भूमिका रही।



