अफवाह बनी आफत: चांडिल में ‘बच्चा चोरी’ की झूठी खबर से मची अफरातफरी, पुलिस की तत्परता से टला बड़ा हादसा

चांडिल, 02 मार्च : क्षेत्र में इन दिनों कथित ‘बच्चा चोर गिरोह’ के सक्रिय होने की अफवाहों ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है। चौक-चौराहों से लेकर गांव की गलियों तक इस तरह की चर्चाएं जोरों पर हैं। हालांकि पुलिस-प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना पर विश्वास न करें और अफवाहों से बचें।
रविवार देर रात चांडिल थाना क्षेत्र के चिलगु एवं आसपास के गांवों में उस समय अफरातफरी मच गई, जब अचानक बच्चा चोरी की खबर फैल गई। बताया गया कि चिलगु के कालिंदी पाड़ा से किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा एक बच्चे को अगवा करने के असफल प्रयास की बात मौखिक रूप से फैलने लगी। देखते ही देखते यह खबर आग की तरह फैल गई।
चाकूलिया, टुईलुंग, शहरबेड़ा, एदलबेड़ा और सीमांगोड़ा समेत आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। लोग कथित बच्चा चोरों की तलाश में श्मशान घाट, नदी किनारे और जंगलों की ओर दौड़ पड़े। रात के अंधेरे में खेत-खलिहान और सुनसान इलाकों में तलाशी अभियान जैसा माहौल बन गया। कई लोग टांगी, तलवार और लाठी-डंडे व टोर्च लेकर इधर-उधर दौड़ते नजर आए।
हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि बच्चे के अपहरण की कोई पुष्टि नहीं हुई थी और पूरी घटना महज अफवाह थी। स्थिति भले ही कुछ समय के लिए नियंत्रित रही, लेकिन भीड़ के उन्माद में किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अनहोनी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
पुलिस की तत्परता से टला बड़ा हादसा
जैसे ही सूचना मिली, चांडिल पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया-बुझाया और शांति बनाए रखने की अपील की। लोगों से कहा गया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सीधे थाना को दें, न कि अफवाहों के आधार पर कानून हाथ में लें। पुलिस की सक्रियता और सूझबूझ से संभावित अप्रिय घटना टल गई।
मॉब लिंचिंग: सख्त कानून और कड़ी सजा
विशेषज्ञों के अनुसार, अफवाहों के कारण देश के कई हिस्सों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें निर्दोष लोगों की जान गई है। भारतीय कानून में ऐसी घटनाओं के लिए सख्त प्रावधान हैं— भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 – हत्या के लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड। धारा 307 – हत्या के प्रयास के लिए कठोर कारावास। धारा 147, 148, 149 – दंगा, घातक हथियार के साथ दंगा और गैरकानूनी जमावड़े के लिए दंड।
धारा 295A, 153A – वैमनस्य फैलाने या समाज में अशांति उत्पन्न करने पर कार्रवाई।
आईटी एक्ट की धारा 66D – सोशल मीडिया पर भ्रामक या फर्जी संदेश प्रसारित करने पर दंड।
इसके अलावा, वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यों को निवारक, उपचारात्मक और दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि “भीड़तंत्र की किसी भी रूप में अनुमति नहीं दी जा सकती” और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रशासन की अपील
पुलिस-प्रशासन ने दोहराया है कि किसी भी प्रकार की अपुष्ट सूचना या सोशल मीडिया संदेश को बिना सत्यापन आगे न बढ़ाएं। संदिग्ध परिस्थिति में स्वयं कार्रवाई करने के बजाय तत्काल संबंधित थाना को सूचना दें।
अफवाहें समाज में भय और अस्थिरता पैदा करती हैं। चांडिल की यह घटना बताती है कि सतर्कता आवश्यक है, लेकिन संयम और कानून पर भरोसा उससे भी अधिक जरूरी है। जागरूक नागरिक बनकर ही हम ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं और समाज में शांति व विश्वास कायम रख सकते हैं।



