तिरूलडीह में हाथियों का कहर, आधा दर्जन घर क्षतिग्रस्त; भागने के दौरान महिला घायल
कुकडू, 26 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र के कुकड़ू प्रखंड स्थित तिरूलडीह गांव में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। बीती रात दलमा क्षेत्र की ओर से आए हाथियों के झुंड ने हरिजन बस्ती में घुसकर करीब आधा दर्जन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। हाथियों ने घरों की दीवारें तोड़ने के साथ अंदर रखा अनाज भी बर्बाद कर दिया। अचानक हाथियों के गांव में घुसने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।
हाथियों के उत्पात से प्रभावित परिवारों में विजय कालिंदी, कृष्ण कालिंदी, मोहन साईं कालिंदी और प्रेम साईं कालिंदी सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों के अनुसार, रात में लोग अपने-अपने घरों में सो रहे थे। इसी दौरान हाथियों ने घरों की दीवारें तोड़नी शुरू कर दीं। दीवार टूटने की आवाज सुनकर लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागने लगे। इसी दौरान एक महिला गिरकर घायल हो गई। बताया गया कि महिला के हाथ में गंभीर चोट आई है और इलाज के लिए उसे अस्पताल ले जाया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि गनीमत रही कि टूटती हुई दीवार सो रहे लोगों पर नहीं गिरी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद से प्रभावित परिवारों में दहशत का माहौल है।
बरसात के बीच हाथियों का आतंक, रातभर जाग रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर लगातार बारिश से लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर जंगली हाथियों के गांव में प्रवेश करने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही गांव में दहशत का माहौल बन जाता है। बिजली गुल होने की स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है। हाथियों के डर से ग्रामीण रातभर जागकर अपने परिवार और घरों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने झारखंड के सरायकेला-खरसावां और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की मांग की है। उनका आरोप है कि हाथियों की आवाजाही को लेकर दोनों राज्यों के विभागों के बीच प्रभावी समन्वय नहीं होने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
मुआवजा और स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षतिग्रस्त मकानों और बर्बाद हुए अनाज का तत्काल सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए सोलर फेंसिंग, प्रशिक्षित पटाखा दल और क्यूआरटी टीम की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के वन विभाग को संयुक्त रूप से हाथियों की निगरानी और ट्रैकिंग कर मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए। उनका कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



