ईचागढ़ में अवैध बालू कारोबार — सवालों के घेरे में थाना पुलिस की भूमिका, डीएमओ की कार्रवाई ने खोली ईचागढ़ पुलिस की पोल

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ईचागढ़ में अवैध बालू कारोबार — सवालों के घेरे में थाना पुलिस की भूमिका, डीएमओ की कार्रवाई ने खोली ईचागढ़ पुलिस की पोल

ईचागढ़, 30 अक्टूबर : जिला खनन पदाधिकारी ज्योति शंकर सतपति के नेतृत्व में बुधवार को ईचागढ़ थाना क्षेत्र में की गई छापेमारी ने न केवल बालू माफियाओं में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि स्थानीय पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीरडीह और जारगोडीह में एक साथ 7 लाख 50 हजार सीएफटी अवैध बालू भंडारण का पकड़ा जाना यह साबित करता है कि ईचागढ़ क्षेत्र में लंबे समय से धड़ल्ले से अवैध खनन, भंडारण और परिवहन का गोरखधंधा चल रहा था — और यह सब थाना की नाक के नीचे हो रहा था।

सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी मात्रा में बालू आखिर एक-दो दिन में तो जमा नहीं हुई होगी। 7.5 लाख सीएफटी बालू का भंडारण रातोंरात संभव नहीं है। इसका अर्थ साफ है कि क्षेत्र में लगातार और व्यवस्थित रूप से अवैध बालू कारोबार चल रहा था। ऐसे में यह मानना मुश्किल नहीं कि या तो ईचागढ़ पुलिस की मिलीभगत इस धंधे में रही है, या फिर पुलिस का सूचनातंत्र पूरी तरह से फेल हो चुका है। दोनों ही स्थितियां बेहद चिंताजनक हैं।

थाना प्रभारी की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। यदि ईचागढ़ थाना पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो जिला खनन पदाधिकारी को इतनी बड़ी कार्रवाई करने की नौबत ही नहीं आती। आखिर यह कैसे संभव है कि पूरे इलाके में हजारों ट्रकों के बराबर बालू जमा हो जाए और थाना प्रशासन को भनक तक न लगे? यह या तो लापरवाही है, या फिर मिलीभगत।

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देश पर डीएमओ ज्योति शंकर सतपति की इस कार्रवाई ने न केवल अवैध बालू कारोबार पर चोट की है, बल्कि यह भी उजागर किया है कि स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कितनी ढीली है। अब आवश्यक है कि जिले का उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक इस मामले में थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच कराए — ताकि यह तय किया जा सके कि यह प्रशासनिक विफलता थी या फिर भ्रष्टाचार की साजिश।

क्योंकि सच यही है — जब कानून की रखवाली करने वाले ही आँख मूँद लें, तो अपराधी बेखौफ हो जाते हैं। और ईचागढ़ का हाल फिलहाल यही बयां कर रहा है।

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