सिंहभूम कॉलेज चांडिल में कुड़माली भाषा की पढ़ाई शुरू कराने की मांग तेज, जिप उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने प्राचार्य से की मुलाकात
चांडिल, 11 जून: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल स्थित एकमात्र सरकारी डिग्री स्तर की शैक्षणिक संस्थान सिंहभूम कॉलेज, चांडिल में कुड़माली भाषा की पढ़ाई शुरू कराने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्रीय भाषा, संस्कृति और पहचान को उच्च शिक्षा में उचित स्थान दिलाने को लेकर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो के नेतृत्व में लगातार पहल की जा रही है। इसी क्रम में गुरुवार को उन्होंने सिंहभूम कॉलेज के प्राचार्य से मुलाकात कर नए शैक्षणिक सत्र से ही कॉलेज में कुड़माली विषय की पढ़ाई प्रारंभ करने की मांग की।
मुलाकात के दौरान मधुश्री महतो ने कहा कि चांडिल अनुमंडल समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कुड़माली भाषा और संस्कृति से जुड़े हुए हैं। विद्यालय स्तर पर कई विद्यार्थी कुड़माली भाषा का अध्ययन करते हैं और इस विषय में आगे भी पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन क्षेत्र के एकमात्र डिग्री कॉलेज में इसकी व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में कुड़माली विषय की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को सरायकेला स्थित काशी साहू कॉलेज, कोल्हान विश्वविद्यालय के अन्य कॉलेजों अथवा रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्थानों का रुख करना पड़ता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और कई छात्र-छात्राएं अपनी मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर से वंचित रह जाते हैं।
जिप उपाध्यक्ष ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भी भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। ऐसे में सिंहभूम कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान में कुड़माली भाषा की पढ़ाई शुरू होना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को भी नई दिशा मिलेगी।
मधुश्री महतो ने बताया कि इस संबंध में कॉलेज प्राचार्य के साथ सकारात्मक चर्चा हुई है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों की मांग और क्षेत्रीय आवश्यकता को देखते हुए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने तथा संबंधित उच्च अधिकारियों और विश्वविद्यालय स्तर पर पहल करने का भरोसा दिया है।
वहीं क्षेत्र के विद्यार्थियों और भाषा प्रेमियों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि चांडिल अनुमंडल में कुड़माली भाषी आबादी की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में स्थानीय विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में कुड़माली विषय से स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिलना चाहिए।
अब क्षेत्र के लोगों की नजर कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो आने वाले समय में चांडिल के विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा, जो क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
गौरतलब हो कि पिछले दिनों जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा था और सिंहभूम कॉलेज में कुड़मालि भाषा की पढ़ाई शुरू करवाने की मांग की थी।