चांडिल डैम के विस्थापितों ने पुनर्वास कार्यालय का किया गेट जाम, 43 वर्षों से लंबित पुनर्वास अधिकारों के समाधान की मांग

चांडिल, 04 नवंबर : स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना चांडिल बांध के विस्थापितों की समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग को लेकर मंगलवार को विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ने पुनर्वास कार्यालय का गेट जामकर धरना प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने सरकार से 43 वर्षों से लंबित पुनर्वास और नौकरी से जुड़ी मांगों को तत्काल पूरा करने की अपील की।
फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि चांडिल बांध के कारण विस्थापित हुए 116 गांवों के परिवार अब भी अपने वैध अधिकारों और पुनर्वास लाभों से वंचित हैं। कई बार सरकार को आंदोलन, धरना, प्रदर्शन और आमरण अनशन के माध्यम से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। आंदोलन में विस्थापित क्षेत्र के गांवों से सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और दिव्यांगजन शामिल हुए, जिन्होंने नारेबाजी कर अपनी आवाज बुलंद की।
मौके पर कहा गया कि 43 वर्षों से अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे विस्थापित अब और अन्याय सहन नहीं करेंगे।
विस्थापितों ने आरोप लगाया कि विस्थापितों के हक़ और अधिकार लूटे जा रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे फेडरेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने परियोजना के कुछ अधिकारियों और कर्मियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितता करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि विस्थापित अधीन अधिकारी और बांध प्रमंडल के कुछ कर्मचारी करोड़ों का मालिक बन गए हैं, जिनकी संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
आंदोलन के दौरान विस्थापितों ने बांध अंचल कार्यालय चांडिल का गेट जाम कर अधिकारियों को बाहर बुलाया और अपनी मांग पत्र की प्रति सौंपी। अधिकारियों से सवाल किया गया कि आखिर इतने वर्षों बाद भी विस्थापित परिवारों को न्याय क्यों नहीं मिला।
फाउंडेशन ने मांग की है कि झारखंड राज्य जल संसाधन विभाग क्षेत्रीय लिपिकीय पद सीधी भर्ती नियमावली, 2025 के तहत चांडिल बांध के विस्थापितों की शीघ्र बहाली की जाए और बहुउद्देशीय कर्मी भर्ती नियमावली अंतर्गत चतुर्थवर्गीय पदों पर विस्थापितों को सीधी नियुक्ति दी जाए। विस्थापितों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।



