बड़ी खबर | अवैध बालू कारोबार पर शिकंजा कसने वाली जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो को जान का खतरा! प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया चौंकाने वाला खुलासा

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बड़ी खबर | अवैध बालू कारोबार पर शिकंजा कसने वाली जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो को जान का खतरा! प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया चौंकाने वाला खुलासा

सरायकेला, 18 जुलाई , विशेष संवाददाता : अवैध बालू खनन पर लगातार मुखर होकर कार्रवाई की मांग करने वाली जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो अब खुद खतरे के साए में जी रही हैं। शुक्रवार को सरायकेला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि बीते कुछ दिनों से उनके वाहन का रात के समय पीछा किया जा रहा है। यह गंभीर आरोप उन्होंने बालू माफियाओं पर परोक्ष रूप से लगाते हुए कहा कि उन्हें जान से मारने की धमकी का अंदेशा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला परिषद अध्यक्ष एवं खरसावां विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सोनाराम बोदरा भी उपस्थित थे। उन्होंने मधुश्री महतो के आरोपों को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तुरंत सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।

बालू माफियाओं के काले कारनामों का पर्दाफाश

ज्ञात हो कि विगत दिनों मधुश्री महतो के नेतृत्व में ग्रामीणों की सहायता से बालू लदे दो हाईवा ट्रकों को पकड़ा गया था। इस घटना के बाद से ही बालू माफिया बौखलाए हुए नजर आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बालू कारोबार में संलिप्त लोगों का एक संगठित सिंडिकेट जिला स्तर से लेकर ऊपरी प्रशासनिक स्तर तक सक्रिय है, जो किसी भी प्रकार की जांच या कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश करता है।

प्रशासन को दी गई जानकारी

मधुश्री महतो ने बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में जिला प्रशासन और पुलिस को जानकारी दी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए ताकि वे स्वतंत्र रूप से जनहित के मुद्दों पर आवाज उठा सकें।

सोनाराम बोदरा का समर्थन

जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि जो जनप्रतिनिधि जनहित में काम कर रहे हैं, उन्हें डराने-धमकाने अथवा फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनपर सख्त कार्रवाई की जाए।

अब आम जनता के बीच सवाल उठने लगे हैं…क्या बालू माफियाओं के निशाने पर हैं मधुश्री महतो? क्या अवैध कारोबारियों की मिलीभगत से हो रही है जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाने की साजिश? प्रशासन कब तक चुप्पी साधे रहेगा?

यह मामला अब सिर्फ एक जनप्रतिनिधि की सुरक्षा का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र और व्यवस्था की जवाबदेही का है। अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह माफिया तंत्र और भी अधिक बेलगाम हो जाएगा।

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