दलमा क्षेत्र के 135 गांवों की अनदेखी का आरोप, ‘रन फॉर गजराज’ व बर्ड फेस्टिवल पर ग्राम सभा की सहमति पर उठे सवाल

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दलमा क्षेत्र के 135 गांवों की अनदेखी का आरोप, ‘रन फॉर गजराज’ व बर्ड फेस्टिवल पर ग्राम सभा की सहमति पर उठे सवाल

चांडिल, 12 मार्च : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से सटे गांवों से जुड़े मुद्दों को लेकर स्थानीय प्रतिनिधियों ने योजनाओं और आयोजनों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को गोलचक्कर स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में माझी बाबा सह कार्ज़ी बाबा मनोहर हांसदा और सत्यनारायण मुर्मू ने संयुक्त रूप से कहा कि दलमा क्षेत्र के 135 गांवों से जुड़े कई फैसले बिना ग्राम सभाओं की स्पष्ट सहमति के लिए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि हाल के वर्षों में दलमा क्षेत्र में “रन फॉर गजराज” जैसे बड़े आयोजन किए गए, जिनका व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ और बाहरी प्रतिभागियों ने भाग लिया। लेकिन स्थानीय युवाओं को न तो पर्याप्त तैयारी का अवसर मिला और न ही उन्हें प्राथमिकता दी गई। अब प्रस्तावित बर्ड फेस्टिवल के लिए 1500 रुपये पंजीकरण शुल्क निर्धारित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्र में इतनी राशि स्थानीय छात्र-छात्राओं के लिए अवसर से अधिक बाधा बन सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईको-सेंसिटिव ज़ोन के नाम पर 135 गांवों में जमीन, जंगल, निर्माण और पारंपरिक गतिविधियों पर सख्त नियम लागू हैं, लेकिन जब बड़े आयोजन और योजनाएं बनाई जाती हैं तो ग्राम सभाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती।

वक्ताओं ने कहा कि दलमा क्षेत्र के कई गांवों में आज भी आदिवासी और मूलवासी परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचना जरूरी है, ताकि विकास के साथ उनकी वास्तविक जरूरतों को भी प्राथमिकता मिल सके।

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