धुमधाम से मनाया गया अग्राहन संक्रांति, घर-घर बना पारंपरिक पीठा – जानिए छोटा मकर पर्व की परंपरा

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धुमधाम से मनाया गया अग्राहन संक्रांति, घर-घर बना पारंपरिक पीठा – जानिए छोटा मकर पर्व की परंपरा

चांडिल, 17 दिसंबर : अग्राहन संक्रांति के अवसर पर जिलेभर में परंपरागत पर्व छोटा पुस (छोटा मकर पर्व) श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर ग्रामीण और शहरी इलाकों में सुबह से ही घर-घर चूल्हों पर पारंपरिक पीठा बनाने की परंपरा निभाई गई। नए धान के चावल, गुड़ और तिल से बने पीठा, छिलका और अरसा जैसे व्यंजन खास आकर्षण का केंद्र रहे। वहीं, इस पर्व के मौके पर अनेकों स्थान पर खेलकूद प्रतियोगिता – फुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन आदि प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।

पर्व के अवसर पर परिवारजनों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया। कई स्थानों पर बुजुर्गों ने खेतों और अन्न की समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना की तथा आने वाले पुस महीने में खुशहाली की कामना की।

छोटा पुस पर्व से क्षेत्र की लोक-संस्कृति, कृषि परंपरा और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूती मिलती है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

हुई टुसू की स्थापना, लोक परंपराओं से गूंजा क्षेत्र

अग्राहन संक्रांति के अवसर पर जिले के विभिन्न गांवों और मोहल्लों में पारंपरिक रूप से टुसू देवी एवं चौड़ल की स्थापना की गई। मनभूम कैलेंडर के अनुसार टुसू की स्थापना के साथ ही आज से पौष मास की शुरुआत हो जाएगी, जिसे लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष उत्साह देखा गया।

स्थापना के बाद युवतियों और महिलाओं द्वारा टुसू गीत गाए गए तथा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। गांवों में टुसू मंडप सजाए गए, जहां प्रतिदिन भजन, गीत और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

लोक मान्यताओं के अनुसार पौष मास के दौरान टुसू पर्व से कृषि समृद्धि, सुख-शांति और खुशहाली की कामना की जाती है। मकर संक्रांति तक चलने वाले इस पर्व के दौरान टुसू विसर्जन के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

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