विस्थापित व पुनर्वास आयोग में राज्य के विस्थापितों को ही शामिल करने की मांग

चांडिल, 05 सितंबर : विस्थापित व पुनर्वास आयोग बनना विस्थापितों के लिए हितकारी मामला है और स्वागत योग्य है। अब आयोग में राज्य के विस्थापितों को जोड़कर धरातल पर विस्थापित हितैशी काम करने आवश्यकता है। लेकिन आयोग में विस्थापितों को ही शामिल करने जैसी जिक्र नहीं है। इससे कोई सारे सवाल खड़ा हो रहा है। इस संबंध में चांडिल डैम विस्थापित संघर्ष समिति के सचिव विवेक सिंह बाबू ने कहा कि आयोग मे किस प्रकार से विस्थापितों का भला होगा, सुविधा उपलब्ध कैसे कराई जाएगी, आयोग में किसको स्थान मिलेगा इस सबका उल्लेख है। लेकिन विस्थापितों को आयोग में शामिल करने के लिए उपयुक्त नहीं समझा गया। इसको लेकर विस्थापितों में निराशा है।
कहीं पुनर्वास नीति जैसा तो नहीं होगा आयोग
विवेक सिंह बाबू ने कहा कि विस्थापित व पुनर्वास आयोग को लेकर विस्थापितों में खुशी के साथ गम भी है। उन्होंने कहा कि विस्थापितों को अंदेशा है कि कहीं विस्थापित आयोग बनाकर सरकार विस्थापितों को ही रुलाने और ठगने का काम तो नहीं करेगी। विस्थापित ऐसा इसलिए सोच रहे कि क्योंकि पुनर्वास नीति के नाम पर वे अबतक ठगे जा रहे हैं। सरकार के पुनर्वास नीति में विस्थापितों को जो लाभ और सुविधाएं मिलने की बात कहीं गई है , वह अबतक उन्हें नहीं मिला है। विस्थापित आशंका जता रहे हैं कि कहीं विस्थापित पुनर्वास नीति केवल एक झांसा बनकर न रह जाए। सरकार को इसे दृढ़ ईच्छाशक्ति के साथ धरातल पर विस्थापितों के हित में लागू करना होगा।
अब राजनीति का खुराक नहीं बनेंगे विस्थापित
झारखंड के विस्थापित अब राजनीति का खुराक नहीं बनेंगे। राज्य के चांडिल स्थित सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के विस्थापित भी बीते 43 वर्षो से ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के राजनीति का मुख्य केंद्रबिंदु बनते आ रहे हैं। विवेक सिंह बाबू ने कहा कि विस्थापितों के बहुप्रतिक्षित मांग पुरी होने के बाद अब ईचागढ़ में 43 वर्षो चला आ रहा ठगनीति मुद्दा समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के हित में आयोग में संपूर्ण भागीदारी विस्थापितों की ही होनी चाहिए, ताकि विस्थापितों का हितकारी पुनर्वासित सुख-सुविधा उपलब्ध के नाम पर विस्थापित को ही ठगने जैसी नौबत पैदा नही हो। विस्थापित ही विस्थापितों का दुख-दर्द को समझ पाएंगे और राज्य के विकास में काम करेंगे।



