सरायकेला खरसावां जिला में बालू घाटों की ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया शुरू, दो समूहों में बांटे गए घाट, 25 और 20 करोड़ से शुरू होगी बोली

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सरायकेला खरसावां जिला में बालू घाटों की ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया शुरू, दो समूहों में बांटे गए घाट, 25 और 20 करोड़ से शुरू होगी बोली

सरायकेला/चांडिल, 04 सितंबर : सरायकेला खरसावां जिले में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बार प्रशासन ने नया प्रयोग करते हुए जिले के घाटों को दो समूहों में बांटकर नीलामी कराने का फैसला लिया है। चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के घाटों को ग्रुप ए और सरायकेला अनुमंडल क्षेत्र के घाटों को ग्रुप बी में रखा गया है। बालू घाटों को अलग-अलग निलामी नहीं कर समूह बनाकर निलामी किए जाने के कारण संभावना जताई जा रही है कि ऐसे में स्थानीय कारोबारियों की हिस्सेदारी लगभग नामुमकिन हो जाएगी।

ग्रुप ए का 25 करोड़ और ग्रुप बी का 20 करोड़ से शुरुआत

चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के सोरो-जरगोडीह, सोरो-बिरडीह, बामुनडीह-गोविंदपुर-सपादा और बालीडीह-चांडिल घाटों को मिलाकर बने ग्रुप ए की न्यूनतम बोली 25 करोड़ रुपये तय की गई है। अधिकारियों का मानना है कि इन घाटों में बड़े निवेशकों की रुचि रहेगी और सरकार को एकमुश्त राजस्व मिलेगा। वहीं, सरायकेला से जुड़े सरजामडीह, नुआडीह, चमारु, जादुडीही, बालीडीह-राजनगर और लक्ष्मीपुर घाटों को मिलाकर बनाए गए ग्रुप बी की न्यूनतम कीमत 20 करोड़ रुपये रखी गई है। इस ग्रुप में भी बड़ी कंपनियों के शामिल होने की उम्मीद है।

छोटे कारोबारियों को नहीं मिलेगा लाभ

विभाग द्वारा समूह में निलामी किए जाने के कारण क्षेत्र के छोटे बालू कारोबारियों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। ऐसे में इस प्रक्रिया से छोटे कारोबारी खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि घाटों की नीलामी व्यक्तिगत आधार पर होती तो वे भी भागीदारी कर पाते। समूह आधारित नीलामी में बड़े पूंजीपतियों का दबदबा रहेगा। इसको लेकर छोटे कारोबारी चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य

नीलामी को पारदर्शी बनाने के लिए इसे पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है। इच्छुक प्रतिभागियों को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। बोली की तारीख और समय पहले ही पोर्टल पर उपलब्ध करा दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने से अवैध खनन पर भी अंकुश लगेगा और उद्योग जगत को बालू की आपूर्ति बेहतर ढंग से हो सकेगी। नीलामी से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलेगा।

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