नरसिंह इस्पात पर भड़के जिप अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, कंपनी पर वन भूमि कब्जा और किसानों का पानी हड़पने का आरोप

चांडिल, 29 अगस्त : सरायकेला-खरसावां जिले में खूंटी स्थित नरसिंह इस्पात लिमिटेड के विस्तार प्रस्ताव को लेकर शुक्रवार को हुई जनसुनवाई जमकर विवादों में रही। कंपनी परिसर में आयोजित इस जनसुनवाई का जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो और सामाजिक कार्यकर्ता करमू मार्डी ने बहिष्कार कर दिया। उन्होंने इसे पूरी तरह से “ग्रामीणों की अनदेखी और कंपनी प्रबंधन का खेल” करार दिया।
चौका स्थित एक होटल में प्रेस कांफ्रेंस कर जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि जनसुनवाई कंपनी परिसर में करना ही अपने आप में गलत है। ग्रामीणों की अनुपस्थिति और उनके विरोध के बावजूद इसे कंपनी प्रबंधन ने जबरन आयोजित किया। बोदरा ने आरोप लगाया कि नरसिंह इस्पात स्थानीय लोगों को न तो सीएसआर फंड से कोई लाभ देता है और न ही मजदूरों को सरकारी नियमों के मुताबिक वेतन, पीएफ, ईएसआई और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा, “ग्रामीणों ने जिस उम्मीद से कंपनी को यहां स्थापित करने की सहमति दी थी, वह उम्मीद पूरी तरह से टूट चुकी है। कंपनी ने क्षेत्र के लोगों के साथ धोखा किया है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
वन भूमि पर कब्जा और किसानों का पानी हड़पने का आरोप
वहीं, जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कंपनी के गंभीर कारनामों का खुलासा करते हुए कहा कि नरसिंह इस्पात लिमिटेड ने कई एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। यही नहीं, सिंचाई के लिए किसानों को मिलने वाली पालना डैम की नहर का पानी भी कंपनी द्वारा अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जो पानी किसानों की फसल के लिए है, वही पानी कंपनी अपनी फैक्ट्री में डकार रही है।”
महतो ने आगे बताया कि हाथियों का चांडिल क्षेत्र में लगातार हो रहा आतंक भी कंपनी की वजह से है। जिस इलाके में फैक्ट्री बनाई गई है, वह पहले हाथियों का कॉरिडोर था। कंपनी की स्थापना के बाद हाथियों का प्राकृतिक रास्ता बंद हो गया और वे गांवों में घुसकर उत्पात मचाने लगे।
दिशा बैठक में उठेगी आवाज
जिप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 30 अगस्त को जिला समाहरणालय में होने वाली दिशा की बैठक में नरसिंह इस्पात कंपनी के “काले कारनामों” को प्रमुखता से उठाया जाएगा। साथ ही, उन्होंने मांग की कि कंपनी परिसर में हुई जनसुनवाई को रद्द घोषित कर सार्वजनिक स्थल पर ग्रामीणों की मौजूदगी में नई जनसुनवाई आयोजित की जाए।
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