झारखंड में आपदा प्रबंधन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक, कई अहम फैसले

रांची, 08 अगस्त : झारखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य में आपदाओं के प्रभाव को कम करने और पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में तय किया गया कि जामताड़ा, दुमका और बरहेट में विशेष सर्वेक्षण के बाद ‘मिटिगेशन प्रोजेक्ट फॉर लाइटनिंग सेफ्टी’ की शुरुआत की जाएगी। इसके तहत वज्रपात की घटना से औसतन तीन घंटे पहले लाउडस्पीकरों के जरिए चेतावनी दी जाएगी, जिससे जनहानि को कम किया जा सके।
आपदा प्रबंधन क्षमता को बढ़ाने के लिए हर जिले से दो गोताखोरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही प्रमुख जलप्रपातों पर लोहे की जालियां और चेन लगाकर दुर्घटनाओं की रोकथाम की जाएगी।
बैठक में जीआईएस पोर्टल के माध्यम से जीपीएस आधारित स्थान की पहचान कर पीड़ितों को सीधे उनके खाते में डिजिटल भुगतान करने की व्यवस्था लागू करने का भी निर्णय हुआ।
फसल क्षति राहत के तहत रांची, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जिलों में कुल 2,390 हेक्टेयर भूमि पर बर्बाद फसलों के लिए सभी संबंधित जिलों को तत्काल आपदा राहत राशि उपलब्ध कराई गई।
इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों को भी अन्य आपदाओं के समान 4 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है।
मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि हर महीने समग्र समीक्षा बैठक कर योजनाओं की प्रगति का आंकलन किया जाएगा, ताकि समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
इन निर्णयों से राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था मजबूत होने और प्रभावितों को शीघ्र सहायता मिलने की उम्मीद है।



