रांची में 108 एम्बुलेंस कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

रांची,संवाददाता ,29 जुलाई : झारखंड की राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े चालकों और तकनीशियनों ने सोमवार से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। मरीजों, खासकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को राजधानी रांची में एम्बुलेंस चालकों ने अर्ध नग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया।
12 घंटे ड्यूटी, सुविधाएं नदारद
हड़ताल पर गए कर्मियों का कहना है कि उन्हें निजी संस्था ‘समाधान फाउंडेशन’ द्वारा 12 घंटे की लंबी ड्यूटी दी जा रही है, परंतु इसके बदले उन्हें न तो उचित वेतन मिल रहा है, न ही EPF, ESI, बीमा, जॉइनिंग लेटर या साप्ताहिक अवकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं। प्रदर्शनकारी चालकों का आरोप है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें ठेके पर रखा गया है और शोषण की स्थिति लगातार बनी हुई है।
यह हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें:
न्यूनतम वेतन, EPF, ESI और बीमा की सुविधा सुनिश्चित की जाए। सेवा को नियमित कर स्थायी नियुक्ति दी जाए और सेवानिवृत्ति की आयु 60–62 वर्ष तक की जाए। निजी एजेंसी को हटाकर सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अधीन भुगतान हो। निलंबित कर्मियों की तत्काल बहाली की जाए। फरवरी और मार्च महीने का बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभों का भुगतान हो। जर्जर एम्बुलेंसों की मरम्मत या उन्हें बदला जाए।
ग्रामीण इलाकों में सेवा पूरी तरह ठप
हड़ताल का सर्वाधिक असर ग्रामीण इलाकों में देखा जा रहा है। बेड़ो, नामकुम, अनगड़ा, सिल्ली, सोनाहातू जैसे क्षेत्रों में एम्बुलेंस सेवाएं पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। इसके अलावा कोल्हान के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिम सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावां जिला में खासा असर देखने को मिल रहा है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए अब ऑटो, बाइक या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे गरीब और वंचित वर्ग की परेशानी और बढ़ गई है।
अन्य जिलों में भी आंदोलन का असर
रांची के अलावा धनबाद, जमशेदपुर, चतरा, कोडरमा, हजारीबाग जैसे जिलों में भी 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल हो चुके हैं। वहां भी स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं और कई अस्पतालों में मरीजों को लाने-ले जाने में समस्या उत्पन्न हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी
अब तक राज्य सरकार या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। हालांकि, कुछ जिलों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निजी एम्बुलेंस और स्थानीय साधनों की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन यह समाधान अस्थायी है और संकट की गंभीरता को नहीं झुठला सकता।
संघ ने चेताया – मांगे पूरी नहीं हुईं तो जारी रहेगा आंदोलन
प्रदर्शनकारी यूनियन के प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर न्यायोचित मांगों को पूरा करने की अपील की है, जिससे राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पुनः सामान्य हो सकें।



