शिक्षकों की उपस्थिति पर तकनीक का ब्रेक! – “ऐप की त्रुटियों ने समय पर स्कूल पहुंचने वाले शिक्षकों को बनाया ‘अनुपस्थित'”

जमशेदपुर/पटमदा, 29 जुलाई ,विशेष रिपोर्ट : पटमदा और बोड़ाम प्रखंड के सैकड़ों शिक्षकों की समय पर स्कूल पहुंचने के बावजूद उनकी उपस्थिति सरकारी रिकॉर्ड में ‘अनुपस्थित’ या ‘अवकाश पर’ दर्ज की जा रही है। कारण – तकनीक आधारित ई-विद्यावाहिनी ऐप की विफलता। शिक्षकों की मानें तो यह तकनीकी संकट अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि मानसिक तनाव और प्रशासनिक अनदेखी का कारण बन चुका है।
प्राथमिक शिक्षक प्रबोध कुमार महतो बताते हैं कि वे समय से विद्यालय पहुंचते हैं, लेकिन ई-विद्यावाहिनी ऐप में नवीनतम अपडेट आने के बाद ऐप बार-बार क्रैश हो रहा है। कई बार तो बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने का विकल्प ही बंद हो जा रहा है। “आधा घंटा तक प्रयास करने के बाद भी उपस्थिति दर्ज नहीं होती। ऐसे में हम चाहकर भी ‘अनुपस्थित’ हो जाते हैं,” – उन्होंने कहा।
समस्या तब और जटिल हो गई जब ऐप में अपडेट का पॉप-अप आने लगा, और अनिवार्य अपडेट के बाद ऐप की कार्यप्रणाली ही बिगड़ गई। कई शिक्षकों के फोन में ऐप खुद-ब-खुद अपडेट हो गया, लेकिन अपडेट के बाद बायोमेट्रिक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया।
इस तकनीकी संकट को लेकर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ, पटमदा-बोड़ाम इकाई ने शिक्षकों की ओर से प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि जब तक ऐप की कार्यप्रणाली दुरुस्त नहीं होती, तब तक उपस्थिति दर्ज न हो पाने की स्थिति को ‘अनुपस्थिति’ के रूप में न जोड़ा जाए। साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था या समयसीमा में ढील की मांग की गई है।
इस ज्ञापन सौंपने के दौरान मधुसूदन प्रसाद, राजेश मिश्रा, लक्ष्मी कांत महतो, दिनेश मालाकार, सुब्रत कुमार मल्लिक, तापस हालदार, अजय कुमार, अजित कुमार, राज नारायण दत्त, नरेंद्र नाथ दत्त समेत कई शिक्षक उपस्थित रहे।
प्रश्न यह है कि जब शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचकर भी तकनीकी विफलता के कारण अनुपस्थित माने जा रहे हैं, तो क्या यह शिक्षकों की जवाबदेही है या सिस्टम की असफलता?
अब देखना है कि प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है – क्योंकि एक शिक्षक की उपस्थिति केवल उसकी ‘उंगलियों की छाप’ नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है।



