नशे से नवजीवन तक : बदलती तस्वीर रीडिंग पंचायत की

सरायकेला, 13 सितंबर : कभी नशे की गिरफ्त में जकड़ा जिले का खरसावां प्रखंड का रीडिंग पंचायत आज उम्मीद और बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिन खेतों में कल तक अफीम की काली छाया फैली रहती थी, वहां अब धान की हरियाली और परंपरागत फसलों की खुशबू तैर रही है।
यह सिर्फ खेती की दिशा बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि पूरी मानसिकता, सोच और जीवनशैली के कायापलट का प्रमाण है। बीते वर्ष झारखंड सरकार के आदेश पर पुलिस और प्रशासन ने अफीम की खेती के खिलाफ सख्त अभियान चलाया। लगभग 100 एकड़ में फैली अफीम की खेती को खत्म करना आसान नहीं था, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयासों ने यह असंभव सा काम संभव कर दिखाया। परिणामस्वरूप 85 एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कर परंपरागत फसलों से जोड़ा गया।
ग्रामीणों ने भी नई राह चुन ली। उनका कहना है कि कभी परिस्थितियों और भटकाव में वे नशे की खेती की ओर चले गए थे, लेकिन अब वे पूरी तरह पारंपरिक खेती को अपनाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। किसानों ने सरकार से अपील की है कि उनकी मेहनत का सही दाम सुनिश्चित किया जाए, ताकि यह बदलाव स्थायी हो सके।
खरसावां थाना प्रभारी गौरव कुमार ने इसे सरकार और पुलिस प्रशासन की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का सहयोग अहम रहा है। वहीं पुलिस अधीक्षक ने भी साफ चेतावनी दी कि यदि भविष्य में दोबारा अवैध खेती की गई तो कठोर कार्रवाई होगी।
इस परिवर्तन की गूंज सामाजिक जीवन में भी सुनाई दे रही है। सरायकेला नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी मनोज कुमार चौधरी कहते हैं, “यह बदलाव सिर्फ खेतों में नहीं, बल्कि सोच में आया है। यही सोच युवाओं को नई दिशा देगी और इलाके को विकास की ओर ले जाएगी।”
कभी नक्सलवाद और अवैध गतिविधियों के लिए पहचान रखने वाला यह इलाका अब सकारात्मकता और उम्मीद की मिसाल बन चुका है। रीडिंग पंचायत की यह यात्रा साबित करती है कि यदि जागरूकता, सहयोग और दृढ़ निश्चय हो, तो समाज की तस्वीर बदलते देर नहीं लगती।



