“ईचागढ़ भाजपा में दिखी गुटबाजी! मंत्री संजय सेठ के स्वागत में बंट गया संगठन, अलग-अलग मंचों पर हुआ अभिनंदन”

चांडिल, 27 जुलाई : चांडिल-पुरुलिया वैकल्पिक मार्ग (बाईपास रोड़) के शुभारंभ अवसर पर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र की भाजपा में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई। रविवार को केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ के आगमन को लेकर भाजपा दो स्पष्ट खेमों में बंटी नजर आई। यह स्थिति तब सामने आई जब निर्धारित शुभारंभ स्थल भालुककोचा चौक पर कुछ भाजपा नेता और कार्यकर्ता संजय सेठ की प्रतीक्षा कर रहे थे, जबकि उसी समय करीब 500 मीटर आगे सैकड़ों भाजपाई ढोल-नगाड़ों के साथ संजय सेठ के स्वागत के लिए खड़े थे।
भाजपा मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा शनिवार को दी गई जानकारी के अनुसार, संजय सेठ का स्वागत एवं उद्घाटन समारोह भालुककोचा चौक पर होना था, लेकिन रविवार का दृश्य कुछ अलग ही देखने को मिला। प्रोटोकॉल की धज्जियां भी उड़ाई गई।
रविवार शाम को संजय सेठ का काफिला घोड़ानेगी होते हुए पहले भालुककोचा चौक पहुंचा जरूर लेकिन शुभारंभ कार्यक्रम नहीं हुआ। उन्होंने पहले नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम में शिरकत की, जो भालुककोचा स्थित नौरंगराय सूर्यादेवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में आयोजित था।
इस दौरान जैसे ही संजय सेठ नागरिक अभिनन्दन कार्यक्रम में उपस्थित हुए इधर विधायक सविता महतो भालुककोचा चौक पहुंच गई। विधायक सविता महतो एवं झामुमो कार्यकर्ता – संजय सेठ के इंतजार में करीब 45 मिनट तक खड़े रहे। बाद में संजय सेठ जब नागरिक अभिनंदन के बाद हाटतोला की ओर बढ़े, तो वहां उपस्थित दूसरे खेमे ने फूल-मालाओं और भाजपा झंडों के साथ उनका स्वागत किया। वहीं संजय सेठ के आग्रह पर विधायक सविता महतो को भी वहां बुलाया गया और फिर संजय सेठ एवं विधायक सविता महतो ने संयुक्त रूप से नए वैकल्पिक मार्ग का उद्घाटन किया।
यहां गौरतलब है कि उद्घाटन स्थल पूर्वनिर्धारित भालुककोचा चौक न होकर चांडिल हाटतोला के पीछे स्थित एक नया स्थान था। इस पूरे घटनाक्रम से भाजपा के अंदर गुटबाजी की स्थिति साफ तौर पर उजागर हुई, जहां दोनों खेमों ने अलग-अलग मंचों से केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम न केवल स्थानीय संगठन की एकता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आगामी सांगठनिक तैयारियों पर भी प्रभाव डाल सकता है। पार्टी नेतृत्व के लिए यह एक चेतावनी है कि संगठन को एकजुट रखने की दिशा में ठोस पहल करनी होगी, अन्यथा ऐसी दरारें भविष्य में बड़ी राजनीतिक चुनौतियों का कारण बन सकती हैं।



