ईचागढ़ का प्रचीनतम चतुर्मुखी शिवलिंग जहां चारों ओर बिखरी है पुरामात्विक धरोहर

डेस्क, 13 जुलाई : झारखंड की कला-संस्कृति, धार्मिक विविधता, प्रकृति के अनुपम व मनोरम वादियां, प्रचाीनतम पुरातात्विक धरोहर काफी विख्यात है. झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में भी कई ऐसे प्राचीनतम धरोहर है जो लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है. कई ऐसे धरोहर है जो हमारी प्राचीन समृद्ध संस्कृति को बताती है. सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड के ईचागढ़ में भी ऐसा ही एक धरोहर है. ईचागढ़ और लेपाटांड गांव के बीच स्थित चतुर्मुखी शिव मंदिर. इस मंदिर में स्थित शिवलिंग के चारों दिशाओं में भगवान शिव शंकर का चेहरा बना हुआ है. बताया जाता है कि ईचागढ़ का चतुर्मुखी शिवलिंग देश के गिने-चुने चतुर्मुखी शिवलिंगों में से एक है. यह मंदिर शिवभक्तों के आस्था का प्रमुख केंद्र है.
सावन में लगता है श्रद्धालुओं का तांता
पवित्र सावन माह में शिवलिंग पर जलार्पण करने के लिए यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. दूर-दराज से शिव भक्त अपनी मनोकामना लेकर ईचागढ़ के चतुर्मुखी शिवलिंग पर जलार्पण करने पहुंचते हैं. सावन माह की सोमवारी पर मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है. सावन के अलावा यहां महाशिवरात्रि पर भक्तों का रेला लगा रहता है. आवागमन की सुविधा नहीं रहने के कारण दूर-दराज के लोग पहले अपने आराध्यदेव के दर्शन-पूजन के लिए चतुर्मुखी शिव मंदिर नहीं पहुंच पाते थे. लेकिन अब ईचागढ़ में पुल बनने के बाद बाहर से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर में भक्तों के लिए किसी प्रकार की सुविधा नहीं रहने के कारण लोग पूजा-अर्चना करने के बाद वापस लौट जाते हैं. यहां ना भक्तों के बैठने की व्यवस्था है और ना बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के रहने की सुविधा है.
ऐसी है मान्यता
कहा जाता है कि चतुर्मुखी शिवलिंग परिसर में एक सुरंग है. जब राजघराने का मुख्यालय देवपुर वर्तमान के दयापुर में हुआ करता था, तब राजा प्रतिदिन सुरंग होकर पूजा करने मंदिर आते थे. उस समय यहां बड़ा मंदिर हुआ करता था और विशाल क्षेत्र में मंदिर फैला था. इसके अवशेष भी अब तक चारों ओर बिखरे पड़े हैं, जो सरकारी उदासीनता के कारण अब धीरे-धीरे धुमिल होने लगे हैं. हजारों साल पुराने इस शिवलिंग के रख रखाव और इसे संरक्षित करने के लिए सरकार की ओर से कोई विशेष पहल नहीं की गई है. ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से एक छोटे मंदिर का निर्माण कराया है. सरकारी राशि से यहां चारदीवारी का निर्माण कराया गया है. यदि सरकार इस क्षेत्र में खुदाई कराए तो यहां पर निश्चित तौर पर किसी बड़े पुरातात्विक धरोहरों की श्रृंखला मिल सकती है.



