पवित्र सावन मास शुरू, मंदिरों में गूंजेगा हर-हर महादेव की गूंज

जलाभिषेक व रूद्राभिषेक के साथ शिव आराधना में लीन रहेंगे भक्त
डेस्क, 11 जुलाई : गुरु पूर्णिमा के बाद शुक्रवार से पवित्र सावन मास की शुभारंभ हो गया है. सावन माह में शिवालयों को आकर्षक रूप से सजाकर महादेव की विशेष श्रृंगार किया जाएगा. वहीं मंदिर प्रबंध समितियों ने सावन माह के दौरान किए जाने वाले महाआरती, जलाभिषेक, रूद्राभिषेक की तैयारी पूरी कर ली है. झारखंड के कोल्हान प्रमंडल क्षेत्र में कई प्राचीनकालीन शिव मंदिर है. वैसे झारखंड के देवघर में ज्योर्लिंग भी है. पवित्र सावन मास के दौरान इन शिवालयों में लाखों की संख्या में शिव भक्त पहुंचकर अपने आराध्यदेव के दर्शन-पूजन करेंगे. सावन की पवित्र माह में अपने आराध्यदेव का दर्शन-पूजन करने का अलग ही महत्व है. इसी लिए शायद शिवभक्त सावन माह की सोमवारी को भोलनाथ पर जलाभिषेक करने के लिए उत्सुक रहते हैं.
इस वर्ष सावन माह की पहली सोमवारी 14 जुलाई को है. सोमवारी में श्रद्धालुओं को अपने आराध्यदेव के दर्शन-पूजन में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसके लिए विभिन्न शिवालयों में व्यापक तैयारियां की जा रही है. सावन मास में शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक और जल अर्पण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. कहते है कि प्रकृति में ऐसे कई फूल-पत्ते खिलते है जो शिव पूजा के लिए आवश्यक होते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला तो भगवान शिव ने उसे पी लिया और अपने कंठ में रोक लिया. इससे उनका शरीर अत्यधिक गर्म हो गया और सृष्टि में संकट आ गया. तब सभी देवताओं ने उन्हें ठंडा करने के लिए उन पर जल अर्पित किया. तभी से शिव भक्त पवित्र सावन मास में अपने आराध्यदेव पर जल चढ़ाते हैं.
विद्धान पंडितों के अनुसार पवित्र सावन मास के सोमवारी पर शिव आराधना का विशेष महत्व रहता है. इस दौरान जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने पर भक्तों को विशेष लाभ मिलता है. सावन के हर सोमवार का अपना खास महत्व है. इस वर्ष पहला सोमवार आयुष्मान योग गणेश चतुर्थी से युक्त होगा. वहीं द्वितीय सोमवार सर्वार्थ सिद्धि योग और एकादशी से युक्त होगा. तृतीय सोमवार बुधादित्य योग में होगा और चतुर्थ सोमवार में सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. साथ ही ब्रह्मा ऐंद्र योग है, जो शिव भक्तों के मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अच्छा है. वैसे सावन का महीना आते ही शिवभक्ति में लीन श्रद्धालु भक्ति रस में डूब जाते हैं. इस दौरान मंदिरों में हर-हर महादेव औश्र बोल-बोम के जयघोष के साथ घंटे-घडियाल व शंख घ्वनि गुंजायमान रहता है.



